छत्तीसगढ़

धर्मांतरण के खिलाफ छत्तीसगढ़ के इस गाँव ने उठाया ठोस कदम…गांव में पास्टर,पादरी का प्रवेश वर्जित है। 

कांकेर : छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर ब्लॉक अंतर्गत ग्राम कुडाल ने धर्मांतरण की बढ़ती घटनाओं के खिलाफ ऐतिहासिक कदम उठाते हुए गांव में पास्टर और पादरियों के प्रवेश पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया है। यह निर्णय गांव की ग्रामसभा में पारित प्रस्ताव के तहत लिया गया, जिसे गांव के सभी लोगों ने सर्वसम्मति से स्वीकार किया।

गांव की सीमाओं पर अब ऐसे बोर्ड लगाए गए हैं जिनमें स्पष्ट रूप से लिखा गया है – “इस गांव में पास्टर और पादरी का प्रवेश वर्जित है।” बोर्ड पर संविधान के प्रावधानों, विशेषकर पंचायत (अनुसूचित क्षेत्र पर विस्तार) अधिनियम – PESA कानून का भी उल्लेख किया गया है।

इस निर्णय के पीछे हाल की एक घटना ने अहम भूमिका निभाई। करीब दस दिन पहले एक धर्मांतरण कर चुकी महिला की मृत्यु के बाद कफन-दफन की प्रक्रिया को लेकर गांव में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। ईसाई परंपराओं और आदिवासी रीति-रिवाजों के टकराव ने विवाद को जन्म दिया।

इस घटना के बाद गांव में आपात ग्रामसभा बुलाकर यह फैसला लिया गया कि बाहरी धर्म प्रचारक या धार्मिक पदाधिकारी (पास्टर/पादरी) अब गांव की सीमा में प्रवेश नहीं कर सकेंगे।

ग्रामीणों का कहना है कि कुडाल गांव पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र में आता है, जहां ग्रामसभा को अपने सामाजिक-सांस्कृतिक ढांचे की रक्षा हेतु निर्णय लेने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है।

गांव के वरिष्ठ जनों ने बताया कि वर्तमान में गांव में लगभग 9 परिवार धर्मांतरण कर चुके हैं, जो पारंपरिक आदिवासी परंपराओं से भिन्न व्यवहार कर रहे हैं। इससे गांव के भीतर सामाजिक एकता और सांस्कृतिक मूल्यों पर असर पड़ रहा है। कुडाल कांकेर जिले का पहला ऐसा गांव बन गया है जिसने धर्मांतरण के खिलाफ इतना ठोस और स्पष्ट निर्णय लेकर एक नई मिसाल कायम की है ।

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