सरकारी अस्पताल की नर्स ने नवजात बच्ची को फर्जी तरीके से दूसरे दंपती को सौंपा…नर्स और दंपती गिरफ्तार…

छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के पत्थलगांव थाना क्षेत्र में एक चौकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें सरकारी अस्पताल की नर्स ने नवजात बच्ची को बीमार बताकर फर्जी तरीके से दूसरे दंपती को सौंप दिया। मामले की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने सोमवार को नर्स और उस दंपती को गिरफ्तार कर लिया है। जानकारी के अनुसार, सरकारी अस्पताल में पदस्थ नर्स अनुपमा टोप्पो (33), ग्राम गिरांग की रहने वाली, ने बच्ची के माता-पिता को बताया कि बच्ची बीमार है और उसे इलाज के लिए बाहर भेजना होगा। इसके बाद नर्स ने कोरबा के रहने वाले दंपती निशिकांत मिंज (43) और सुमन वानी मिंज (43) को बच्ची सौंप दिया।
माता-पिता के अनुसार, सुखदेव नाग की पत्नी दिलासो बाई ने 28 अगस्त को बच्ची को जन्म दिया था। 30 अगस्त को छुट्टी के समय नर्स ने बच्ची को टीका लगाने के बहाने अस्पताल ले जाने का आग्रह किया। नर्स ने माता-पिता से कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवा लिए और उन्हें यह विश्वास दिलाया कि बच्ची का इलाज किया जाएगा। जब लंबे समय तक बच्ची वापस नहीं आई, तो परिवार ने स्थिति की जांच की। तब पता चला कि नर्स ने बच्ची को फर्जी तरीके से कोरबा निवासी निशिकांत मिंज और सुमन वानी मिंज को सौंप दिया था। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए नर्स और दंपती से वैध दस्तावेज मांगे। दस्तावेज पेश न कर पाने पर तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस ने नवजात बच्ची को सुरक्षित बरामद कर चाइल्ड हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में रखा। थाना पुलिस ने नर्स अनुपमा टोप्पो, निशिकांत मिंज और सुमन वानी मिंज के खिलाफ जेजे एक्ट की धारा 80 और 81 के तहत मामला दर्ज किया। सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। एसएसपी शशि मोहन सिंह ने बताया कि नर्स ने माता-पिता को धोखे में रखकर नवजात बच्ची को दूसरे दंपती को सौंपा। शिकायत के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की और बच्ची को सुरक्षित बरामद कर लिया। उन्होंने कहा कि यह घटना अस्पताल के भीतर सुरक्षा और देखरेख में गंभीर कमी को उजागर करती है।
पुलिस ने कहा कि नवजात बच्ची की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई पूरी गंभीरता से की जाएगी। एसएसपी शशि मोहन सिंह ने यह भी कहा कि भविष्य में अस्पतालों में ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए निगरानी प्रणाली और सुरक्षा प्रोटोकॉल को और मजबूत किया जाएगा। इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अस्पतालों में भरोसे और सुरक्षा की आवश्यकता कितनी अहम है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया अपराधियों को कठोर संदेश देती है और पीड़ित परिवार को न्याय सुनिश्चित करती है।



