मध्यप्रदेश

राजयोगिनी अवधेश दीदी को राज्यपाल, मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री से लेकर हजारों लोगों ने दी श्रद्धांजली

राजयोगिनी अवधेश दीदी को राज्यपाल, मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री से लेकर हजारों लोगों ने दी श्रद्धांजली

– मुख्यमंत्री बोले- आपका समर्पण, सेवा एवं आध्यात्मिक जगत को समर्पित जीवन सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा

– अवधेश दीदी पंचतत्व में विलीन, अंतिम संस्कार में देशभर से पहुंचे हजारों लोग हुए शामिल

भोपाल। ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के भोपाल जोन की निदेशिका राजयोगिनी अवधेश दीदी शनिवार को पंचतत्व में विलीन हो गईं। उनकी बैकुंठी यात्रा जोनल मुख्यालय राजयोग भवन से निकाली गई, जिसमें हजारों लोग शामिल हुए। दोपहर 1 बजे सुभाष नगर स्थित मुक्तिधाम में मुखाग्नि दी गई।

इसके पूर्व राजयोग भवन पहुंचकर मप्र के राज्यपाल मंगूभाई पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मप्र के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला सहित हजारों लोगों ने श्रद्धांजली अर्पित कर उनके सेवा कार्यों को याद किया। बता दें कि आपने 19 सितंबर को निजी अस्पताल में इलाज के दौरान दोपहर 12.15 बजे अंतिम सांस ली थी। दो दिन से वह वेंटिलेटर पर थीं और पिछले एक साल से स्वास्थ्य ठीक नहीं चल रहा था।

श्रद्धांजली अर्पित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि श्रद्धेय बीके अवधेश दीदी अब हमारे बीच नहीं हैं। जन्म से मृत्यु तक सबका समय नियत है, लेकिन लोक कल्याण, जन कल्याण के लिए दीदी ने पूरा जीवन जीया है। गृहस्थ जीवन में भी राजयोग ध्यान के माध्यम से आत्म नियंत्रण कैसे हो वह दीदी से सीखने को मिलता है। जब भी उनसे मिलते थे वह स्नेह आशीर्वाद के साथ मिलती थीं। यह शरीर नश्वर है लेकिन विचार अमर हैं। दीदी जी विचारों से, सूक्ष्म शरीर से हमारे बीच में हैं। वह सदैव हमारा मार्ग प्रशस्त करती रहेंगी। दीदी का स्नेह और शिक्षाएं सदैव हमारे साथ रहेंगी। मप्र सरकार की ओर से दीदीजी को श्रद्धा सुमन अर्पित करता हूं। महाकाल से प्रार्थना करता हूं कि दीदी ने जैसा जीवन जीया है। वह स्मृतियां सदैव हमारे साथ रहें। वह हमेशा कमियों को छोड़ने और अच्छाईओं काे धारण करने के लिए प्रेरित करती थीं। आपका समर्पण, सेवा एवं आध्यात्मिक जगत को समर्पित आपका जीवन सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।

दीदी अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा से भरी थीं-

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी अवधेश दीदी का देवलोकगमन हम सभी के लिए अत्यंत दु:खद है। वे रक्षाबंधन सहित अन्य सभी त्योहारों पर घर पधारती थीं और अपने साथ भरपूर स्नेह और आशीर्वाद लाती थीं। दीदी अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा से भरी थीं। उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन लोगों को सही दिशा दिखाने और उनको कल्याण के मार्ग पर लाने के लिए समर्पित कर दिया। दीदी ने हमें छोड़ा नहीं है, उनका आशीर्वाद सदैव हमारे साथ है। इस अवसर पर मध्यप्रदेश विधानसभा के प्रमुख सचिव अवधेश प्रताप सिंह भी मौजूद रहे। वहीं एक दिन पूर्व मप्र के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उनके द्वारा जीवनभर किए गए सेवा कार्यों को याद किया।

ब्रह्माकुमारी में किसी के निधन पर करते हैं योग-तपस्या
ब्रह्माकुमारीज़ में ऐसी मान्यता है कि जब कोई शरीर छोड़ता है और यदि हम दुख मनाते हैं या आंसु बहाते हैं तो उस आत्मा को जिसने शरीर छोड़ा दुखी होती है। इसलिए ब्रह्माकुमारीज़ से जुड़े कोई भी भाई या बहन जब शरीर छोड़ते हैं तो उनकी पार्थिक देह के सामने बैठकर योग-साधना की जाती है। इसमें बीके सदस्य योग के माध्यम से उन्हें शुभ संकल्पों के बाइव्रेशन देते हैं। साथ ही परमात्मा से शक्तियों की किरणें लेकर उस आत्मा को देते हैं ताकि वह शांति का अनुभव करें और अपनी आगे की यात्रा खुशी-खुशी पूरी करे।

अंतिम संस्कार में भाईयों के साथ बहनें भी होती हैं शामिल-

ब्रह्माकुमारीज़ में अंतिम संस्कार व अंतिम यात्रा में भाईयों के साथ बहनें भी शामिल होती हैं। साथ ही मुखाग्नि भी भाइयों के साथ बहनें भी देती हैं। ब्रह्माकुमारीज़ का मानना है कि नारी शक्ति को स्वयं परमात्मा ने आगे बढ़ाया है और विश्व शांति के कार्य में आगे रखा है। अंतिम संस्कार के पूर्व संस्थान का शिव ध्वज पार्थिक शरीर को अर्पित किया जाता है।

अंतिम संस्कार में माउंट आबू से पहुंचे वरिष्ठ पदाधिकारी-

अवधेश दीदी की अंतिम यात्रा में माउंट आबू मुख्यालय से ज्ञान सरोवर की निदेशिका राजयोगिनी बीके प्रभा दीदी, आवास-निवास के प्रभारी बीके देव भाई, प्रशासक सेवा प्रभाग के मुख्यालय संयोजक बीके हरीश भाई, संस्थान के पीआरओ बीके कोमल भाई सहित सैकड़ों लोग पहुंचे। साथ ही इंदौर जोन की निदेशिका राजयोगिनी बीके हेमलता दीदी, भिलाई से बीके आशा दीदी, इंदौर जोनल मुख्यालय से बीके रेवती दीदी, बीके आयुषी दीदी सहित देशभर से हजारों ब्रह्माकुमार भाई-बहनों ने पहुंचकर श्रद्धासुमन अर्पित कर अंतिम विदाई दी।

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