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ब्रह्माकुमारीज़ के महासचिव 92 वर्षीय राजयोगी बृजमोहन भाई नहीं रहे…

आबूरोड (राजस्थान)। ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के महासचिव 92 वर्षीय राजयोगी बृजमोहन भाई नहीं रहे। उन्होंने गुरुवार को दिल्ली मानेसर के एक निजी हॉस्पिटल में इलाज के दौरान सुबह 10.25 बजे अंतिम सांस ली। वह पिछले एक वर्ष से बीमार चल रहे थे। पहले उनका इलाज माउंट आबू स्थित ग्लोबल हॉस्पिटल और फिर अहमदाबाद में चल रहा था। उनकी पार्थिव देह को 9 और 10 अक्टूबर को गुरुग्राम स्थित ओम शांति रिट्रीट सेंटर में दर्शनार्थ रखा गया है।

वहीं 12 अक्टूबर को आबूरोड मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार होगा। एक वर्ष पूर्व राजयोगी निर्वैर भाई के निधन के बाद आपको महासचिव नियुक्त किया गया था। इसके पहले आप अतिरिक्त महासचिव के रूप में सेवाएं दे रहे थे। वर्तमान में आप संस्थान के मुख्य प्रवक्ता और राजनीतिज्ञ सेवा प्रभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी थे।

7 जनवरी 1934 को पंजाब के अमृतसर में जन्मे राजयोगी बृजमोहन भाई ने दिल्ली विश्वविद्यालय से वर्ष 1953 में वाणिज्य (ऑनर्स) में स्नातक किया। यहीं से वर्ष 1955 में कानून (एलएलबी) की डिग्री प्राप्त की। वहीं वर्ष 1956 से आप चार्टर्ड एकाउंटेंट के रूप में मान्यता प्राप्त हैं। ब्रह्माकुमारीज़ की सहयोगी संस्था राजयोग शिक्षा एवं अनुसंधान फाउंडेशन के आप सचिव थे और ब्रह्माकुमारीज़ की एपेक्स कमेटी (उच्च समिति) के सदस्य थे। साथ ही एकाउंट विभाग के आप प्रमुख थे। आप एक कुशल आध्यात्मिक वक्ता और गीता ज्ञान विशेषज्ञ थे।

वर्ष 1955 में पहली बार संस्था के संपर्क में आए-
राजयोगी बृजमोहन भाई की बचपन से ही अध्यात्म में रुचि थी। उन्होंने अपने जीवन में अनेक धर्म-ग्रंथों का पठन-पाठन किया। 22 वर्ष की उम्र में वर्ष 1955 में ब्रह्माकुमारीज़ के संपर्क में आने के बाद आपके जीवन की दिशा ही बदल गई। यहां राजयोग मेडिटेशन सीखने के बाद आपने ब्रह्मचर्य व्रत लेते हुए विश्व सेवा का संकल्प किया। कुछ समय तक आप संस्था से जुड़े रहते हुए जॉब करते रहे। भारत सरकार के फर्टिलाइज़र कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया में 17 वर्ष तक सेवाएं देने के बाद आप वर्ष 1973 में वित्त प्रबंधक के पद से इस्तीफा देकर संस्था में पूर्ण रूप से जुड़ गए।

विश्वभर में अनेक सम्मेलनों में लिया भाग-
आपने संस्थान द्वारा विश्वभर में आयोजित होने वाले अनेक सभा, सम्मेलनों में भाग लिया और मुख्य वक्ता के रूप में जन-जन को आध्यात्मिक ज्ञान से रुबरु कराया। संयुक्त राष्ट्र न्यूयॉर्क में आयोजित सम्मेलनों में ब्रह्माकुमारीज़ की ओर से प्रतिनिधित्व भी किया। साथ ही रूस, अमेरिका, कनाडा, दक्षिण अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड, केन्या, दक्षिण-पूर्व एशिया एवं कैरेबियन देशों का दौरा कर लोगों को भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता का संदेश दिया।

गीता ज्ञान में थी विशेष रुचि-
आपको बचपन से ही पढ़ने-लिखने का शौक रहा। इसके चलते आपकी श्रीमद् भागवत गीता के पठन-पाठन में विशेष रुचि रही। आपने बहुत ही गहराई से गीता का अध्ययन किया। आपके ज्यादातर कार्यक्रम गीता ज्ञान पर आधारित होते थे। आपका मानना था कि श्रीमद् भागवत गीता में जीवन का सार समाया हुआ है। इसका ज्ञान जन-जन तक पहुंचाने से ही लोगों में आत्मिक जागृति और आध्यात्मिकता के प्रति लगन पैदा होगी। इसके अलावा आप गहन आध्यात्मिक सत्यों को हास्य और बुद्धिमत्ता के साथ सरल रूप में प्रस्तुत करने के लिए प्रसिद्ध थे।
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राजयोगी बृजमोहन भाईजी के साथ वर्षों तक सेवाएं दीं। आप संस्थान के आधार स्तंभ सदस्यों में से एक थे। आप कुशल वक्ता, लेखक होने के साथ बहुत अच्छे मार्गदर्शक थे। आपका जाना ब्रह्माकुमारीज़ परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है, जिसे कभी पूरा नहीं किया जा सकता है।
राजयोगिनी बीके मोहिनी दीदी, मुख्य प्रशासिका, ब्रह्माकुमारीज़
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बृजमोहन भाईजी ने अपना पूरा जीवन समाज कल्याण के लिए समर्पित कर दिया। आपने अपनी बुद्धिमत्ता, कुशल मार्गदर्शन से संस्थान को नई ऊंचाई प्रदान की। आपके मार्गदर्शन में एकाउंट विभाग का कुशल संचालन किया जा रहा था। आपका प्रेरक, दिव्य व्यक्तित्व सदा सभी के हृदय में अमर रहेगा।
– राजयोगिनी बीके जयंती दीदी, अतिरिक्त मुख्य प्रशासिका, ब्रह्माकुमारीज़
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