धर्म-आध्यात्म

शान्ति शिखर तनावग्रस्त लोगों को शान्ति की अनुभूति कराएगा… ब्रह्माकुमारी जयन्ती दीदी

छत्तीसगढ़/नवा रायपुर (अटल नगर): प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के नये भवन एकेडमी फॉर ए पीसफुल वर्ल्ड- शान्ति शिखर में  संस्थान की अतिरिक्त मुख्य प्रशासिका ब्रह्माकुमारी जयन्ती दीदी और अतिरिक्त महासचिव ब्रह्माकुमार मृत्युजंय भाई का दिव्य उद्बोधन हुआ। इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी जयन्ती दीदी ने माउण्ट आबू मुख्यालय की ओर से रायपुर संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी को चांदी का कलश भेंट किया। स्टेज पर देश-विदेश से आए सदस्यों सहित शान्ति शिखर के निर्माण में सहयोगी लोगों का सम्मान भी किया गया।

अपने आशीर्वचन में अतिरिक्त मुख्य प्रशासिका ब्रह्माकुमारी जयन्ती दीदी ने कहा कि इस समय दुनिया में अनेक समस्याएं हैं। परिस्थितियों से प्रभावित होकर लोग तनावग्रस्त हो रहेे हैं। शान्ति की तलाश में भटक रहे ऐसी अशान्त आत्माओं को यह भवन गहन शान्ति की अनुभूति कराएगा। यहाँपर परमात्म प्रेरणा से इतना विशाल और सुन्दर आडिटोरियम बना है तो इसके पीछे कोई विशेष प्रयोजन जरूर होगा। सबको यहां से परमात्मा शिवबाबा की पहचान मिलेगी। उन्हें शान्ति की अनुभूति होगी। तपस्वी ब्रह्माकुमार-कुमारियों ने अपना तन-मन-धन लगाकर इसे बनाया है जिसके कारण इस भवन के एक-एक पत्थर में प्रेम, शान्ति और पवित्रता के प्रकम्पन भरे हुए हैं। इसीलिए यहाँ पहुंचने पर बहुत ही सुखद अनुभूति होती है।

उन्होंने कहा कि संसार में भवन तो अनेक बनते हैं लेकिन यह भवन विश्व कल्याण की भावना से बनाया गया है। इसलिए लोग यहाँ शान्ति की तलाश में खींचे चले आएंगे। लोग जब यह महसूस करेंगे कि यहाँ कोई हमें भी सुनने वाला बैठा है। मन को शान्ति देने वाला बैठा है।

उन्होंने कहा कि मन की चंचलता को शान्त करने के लिए उसे ज्ञान की शक्ति से शीतल और शान्त बनाएं। पाजिटिव सोच रखें। ईश्वरीय ज्ञान का चिन्तन करें। एक परमात्मा से अपना सम्बन्ध जोडक़र रखे। मन में यह भाव हो कि जो पाना था वह पा लिया सिर्फ एक ही लक्ष्य रहे कि जो परमात्म सुख मुझे मिला है वह सबको मिले। हमारे योग से वातावरण शुद्घ हो जाता है। जितना हम योग में रहेंगे उतना हमारा त्वरित परिवर्तन होगा। आपके योग द्वारा यहाँ जो पवित्र और शुद्घ प्रकम्पन बन रहे हैं वह यहाँ आने वाले लोगो को भी परिवर्तन के लिए प्रेरित करेगा।

इस अवसर पर अतिरिक्त महासचिव ब्रह्माकुमार मृत्युजंय भाई ने कहा कि रायपुर सेवाकेन्द्र के भाई-बहनों ने तन, मन और धन इस सुन्दर भवन में लगाकर अपना पुण्य जमा किया है। हम राजयोग के साधक और तपस्वी हैं। तपस्वी लोगों की वाणी वरदान बन जाती है। इसलिए कहते हैं संकल्पों से सिद्घि मिलती है। दृष्टि से सृष्टि बनती है। हमारी दृष्टि में इतनी पवित्रता हो कि हम नयी सृष्टि बना सकें।

कार्यक्रम का संचालन इन्दौर की ब्रह्माकुमारी अनिता दीदी ने किया। माउण्ट आबू से आए बीके भानू और युगरत्न भाई ने गीत गाए। रायपुर की बाल कलाकारों ने यज्ञ की विरासत नामक नृत्य नाटक प्रस्तुत कर भाव विभोर कर दिया।

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