धर्म-आध्यात्म

जब मन अस्थिर हो जाता है तो मेडिटेशन मन को संभाल लेता है।- ब्रह्मा कुमार नारायण भाई

अलीराजपुर :  25 नवंबर, हम स्वयं ही अपने जीवन के लेखक और अपने मन को पढने वाले बनें। जितना अधिक हम स्वयं को जानते हैं, उतना ही कम हमें दूसरे की स्वीकृति की आवश्यकता होती है। स्वयं का परिचय आंतरिक शक्तियों का ज्ञान जो प्रत्येक मानव को होनी चाहिए ,अगर इसकी पहचान मिल जाए तो जीवन सफलता से भरपूर बन जाता है।

जीवन में तन, मन, धन से संबंधित कोई भी कमी नहीं रहती है ।आज हम स्वयं को भूल चुके हैं जिसके कारण व्यक्ति छोटी-छोटी बातों में ज्यादा चिंताग्रस्त बनता जा रहा है, जिसके कारण एक अच्छी याददाश्त शक्ति खोता जा रहा है। अब आवश्यकता है मन को शांत करने की। मन की शांति के लिए सकारात्मक सोच, गहरी नींद, राजयोग व सात्विक भोजन से हमारा मस्तिष्क शांत व शक्तिशाली बनता है। इलेक्ट्रॉनिक साधनों, मोबाइल का उपयोग बढ़ने से हमारा मस्तिष्क कमज़ोर व मानसिक रोग बढ़ते जा रहे हैं। जब मन अस्थिर हो जाता है, तो परमात्मा की प्रेमपूर्ण याद आत्मा को भीतर से सँभाल लेती है। उस स्मृति में एक ऐसी शांति और शक्ति छिपी होती है, जो विचारों को स्थिर कर जीवन में संतुलन ला देती है।

शांति का अर्थ है हम कम सोचे ज्यादा करें।

राजयोग से हमारी खोई हुई शक्तियां जागृत होती है हमारा तीसरा नेत्र, विवेक जागृत होने लगता है। यह विचार इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट अलीराजपुर में छात्र-छात्राओं को इंदौर से पधारे जीवन जीने की कला की विशेषज्ञ ब्रह्मा कुमार नारायण भाई ने संबोधित करते हुए बताया।

कार्यक्रम के शुभारंभ में विद्यालय प्रिंसिपल मोहन सिंह जी ने बताया की एक अच्छी सफलता के लिए हार्ड वर्क के साथ-साथ सॉफ्टवेयर बनना आवश्यक है अर्थात हम मन से जितना कम सोचेंगे उतना हमारी सफलता नजदीक आती जाएगी।

ब्रह्माकुमारी सानिया बहन ने संस्था का परिचय देते हुए बताया कि यह संस्था जाति-पाति , ऊंच नीच के भेदभाव से ऊपर उठकर मानव को सही दिशा में मानव बनाने की सेवा कर रही है। आज इंसान के देवी गुण लोप हो गए हैं उन देवी गुणों की स्थापना परमात्मा शिव इस धरा पर आकर पुनः स्थापना कर रहे हैं जिससे यह विश्व सतयुग बन जाएगा। कार्यक्रम के अंत में सभी को नशा मुक्ति रहने की और समाज को नशे से दूर करने की प्रतिज्ञा कराई गई।

कार्यक्रम में आभार प्रकट करते हुए प्रोफेसर सुशीला ने बताया की मन को शांत करने में मेडिटेशन मुख्य भूमिका निभाता है। हम प्रतिदिन मेडिटेशन को अपने जीवन में शामिल कर ले, जैसे जीवन जीने के लिए भोजन की आवश्यकता होती है इसी तरह मेडिटेशन हमारे तन मन को शक्ति प्रदान करता है जीवन में कुशलता आती है।कार्यक्रम के अंत में सभी को आंतरिक शांति का अनुभव मेडिटेशन से कराया गया। ब्रह्मा कुमार अर्जुन भाई ने ईश्वर मेरे साथ है तो डरने की क्या बात है सुंदर गीत की प्रस्तुति दी।

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