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ओड़िशा में 210 जनजाति भाई-बहनों की घर वापसी,अमर हुतात्मा – स्वामी श्रद्धान्दनंद जी एवं स्वामी लक्ष्मानंद जी को समर्पित-प्रबल प्रताप सिंह जूदेव

ओड़िशा : शुद्धि आंदोलन के प्रणेता स्वामी श्रद्धान्दनंद जी के अवतरण दिवस पर विश्व हिंदू परिषद के तत्वावधान में करुआ बहाल, सुंदरगढ़ (ओड़िशा ) में आयोजित ऐतिहासिक एवं आत्मगौरवपूर्ण “आंचलिक जनजाति धर्मरक्षा महायज्ञ” कार्यक्रम में 210 जनजाति भाई-बहनों की अखिल भारतीय घर वापसी प्रमुख प्रबल प्रताप सिंह जूदेव नें वैदिक मंत्र उच्चारण, यज्ञ के उपरांत पांव पखारकर सनातन धर्म में घर वापसी कराई।

यह अवसर सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक स्वाभिमान का प्रेरणादायी प्रतीक बना।

इस गरिमामयी अवसर पर विश्व हिन्दू परिषद प्रांत कार्यकारी प्रमुख श्री अशोक गाँधी जी, विहिप केंद्रीय सह मंत्री श्री अचूता नंदकर जी, श्री दिलीप मेहर जी (विहिप, सुंदरगढ़), श्री करनेल सिंह जी ( विहिप, जशपुर), श्री परमानंद बाघ जी, श्री अनिल कुमार संतुका (विहिप ओड़िशा )एवं अन्य गणमान्यों की विशेष उपस्थिति रही।

यह अभियान परम श्रद्धेय स्वर्गीय कुमार दिलीप सिंह जूदेव जी के प्रेरणा से संचालित किया गया जिन्होंने अपने जीवनकाल में ओड़िशा में लगातार घर वापसी कार्यक्रम किए और आज भी यह अभियान उनकी पावन प्रेरणा और धर्मनिष्ठ संकल्प से उनके पुत्र प्रबल प्रताप सिंह जूदेव निरंतर आगे बढ़ा रहें है। जनजाति समाज की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा हेतु यह प्रयास राष्ट्र एवं धर्म के प्रति समर्पण का सशक्त उदाहरण है। हम सभी उनके दिखाए मार्ग पर चलते हुए संकल्पित हैं कि समाज जागरण और धर्म संरक्षण की यह ज्योति निरंतर प्रज्वलित रहेगी।

कार्यक्रम में प्रबल जी नें कहा कंधमाल, ओड़िशा में ही जनजातियों के मतांतत्रण का षणयंत्र रच रहें मिशनरी माफिया के विरुद्ध स्वामी लक्ष्मान्दनंद जी नें संघर्ष किया था जिससे उनकी कायरतापूर्ण हत्या कर दी गयी थी. आज का यह घर वापसी उन महान संतो को हम समर्पित करके श्रद्धांजलि देते हैँ ” जिन्होंने अपने प्राण न्योछावर कर दिए देश एवं धर्म के लिए”

प्रबल जूदेव नें यह भी कहा कि “जनजाति समाज भारत के आधार स्तम्भ हैँ इसीलिए राष्ट्र विरोधी ताकतें इनको टारगेट करते हैँ. ओड़िशा के जनजाति अपने गौरवपूर्ण पूर्वजों के इतिहास एवं योगदान को नहीं भूले. ओड़िशा के कई अमर स्वतंत्रता सेनानी जैसे वीर सुरेंद्र साई, डोरा बिसोयी, चक्र बिसोयी, रिंडो माझी,धरणीधर नायक जैसे जनजाति योद्धाओं नें अंतिम सांस तक अंग्रेजो से लड़ा और माँ भारती की रक्षा की. आज अंग्रेज़ खदेड़ दिए गए परन्तु मतांतत्रण का बीज बो दिया जो हमारे धर्म, संस्कृति एवं राष्ट्र के लिए सबसे बड़ा खतरा हैँ इसीलिए हमें मिलकर संघठित होकर राष्ट्र विरोधी आसुरी शक्तियों से लड़ना होगा जनजाति हिंदू समाज की एकता ही राष्ट्र की शक्ति है।”धर्मो रक्षति रक्षितः।

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