देश-विदेश

सवा करोड़ सिन्धी सवा सौ करोड़ हिन्दुओं के धर्मगुरु शंकराचार्यों के संपर्क में शास्त्रसम्मत जीवन की मिसाल कायम करें : साईं मसन्द

सवा करोड़ सिन्धी सवा सौ करोड़ हिन्दुओं के धर्मगुरु शंकराचार्यों के संपर्क में शास्त्रसम्मत जीवन की मिसाल कायम करें : साईं मसन्द

सिंधी समाज के विख्यात सखी बाबा आसूदाराम
आश्रम लखनऊ में हुआ साईं मसन्द का उद्बोधन

लखनऊ में सिंधी समाज साईं मसन्द के आह्वान
पर स्थापित करेगा गीतापाठ एवं लोकसेवा केंद्र

सिंधी साहित्य अकादमी लखनऊ के पूर्व अध्यक्ष
श्री नानकचंद लखमाणी ने ली इसकी जिम्मेदारी

रायपुर / लखनऊ। मसन्द सेवाश्रम रायपुर के पीठाधीश साईं जलकुमार मसन्द ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामीश्री अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती महाराज जी के साथ वाराणसी से लखनऊ की चार दिवसीय गौ माता प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध प्रचार यात्रा सम्पन्न होने के बाद ११ व १२ मार्च को दो दिन लखनऊ में सिंधी समाज के विख्यात धाम सखी बाबा आसूदाराम आश्रम में रहे।

आश्रम में साईं जलकुमार मसन्द का उद्बोधन कार्यक्रम रखा गया। साईं मसन्द साहब शंकराचार्य महाराज द्वारा स्थापित १०८ देशों के अंतर्राष्ट्रीय हिन्दू संगठन परम धर्म संसद १००८ के संगठन मंत्री भी हैं। सखी बाबा आसूदाराम आश्रम लखनऊ के हाल ही में ब्रह्मलीन हुए पूज्य संत साईं चाण्डूराम साहब के अनेक वर्षों से साई मसन्द साहब से आत्मीय सम्बन्ध रहे हैं।

अपने उद्बोधन में साईं मसन्द साहब ने कहा कि सवा सौ करोड़ हिन्दुओं के सर्वोच्च धर्मगुरु शंकराचार्य हमें अपना जीवन वैदिक शास्त्रानुकूल जीने की राह रोशन करते हैं। वैदिक ज्ञान मानव जीवन को सुखमय व आनन्दमय बनाने हेतु उसकी जल, थल, नभ से सम्बंधित समस्त आवश्यकताओं की पूर्ति का दार्शनिक, वैज्ञानिक व व्यवहारिक उपाय प्रदान करता है।

साईं मसन्द साहब ने भारत के सवा करोड़ सिन्धियों को सवा सौ करोड़ हिन्दुओं के धर्मगुरु शंकराचार्यों के संपर्क में आकर अपना जीवन शास्त्रसम्मत जीने का परामर्श देते हुए सवा सौ करोड़ हिन्दुओं के बीच शास्त्रसम्मत जीवन की अनुकरणीय मिसाल कायम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हजारों वर्ष पूर्व की सिंधु घाटी की सभ्यता वाले सिंधी समाज की जीवन शैली सदैव से वैदिक शास्त्रानुकूल रही है।
उन्होंने भारत की समस्त सिंधी पंचायतों व समाजसेवी संस्थाओं से प्रत्येक मुहल्ले में रोज़ गीतापाठ एवं लोकसेवा करने हेतु केन्द्र स्थापित करने का आह्वान किया। साईं मसन्द साहब ने कहा कि श्रीमद् भगवत गीता में निष्काम भाव से कर्म करने की शिक्षा दी गई है जो वर्तमान में देश में व्याप्त स्वार्थ के दूषित माहौल के निराकरण हेतु देश की एक अति महत्वपूर्ण आवश्यकता है।

इसके अलावा उन्होंने हर मुहल्ले में लोक सेवा केन्द्र स्थापित कर उसके माध्यम से केन्द्र, राज्य, स्थानीय शासन एवं लोकसेवी संस्थाओं की योजनाओं का लाभ सम्बंधित हितग्राहियों को दिलाने की मुहिम चलाने का भी आह्वान किया है।

उन्होंने कहा कि यह मुहिम देश के वास्तविक विकास के साथ-साथ सरकारी कार्यों में व्याप्त भ्रष्टाचार कम होने में भी सहायक बनेगी। सिंधी साहित्य अकादमी लखनऊ के पूर्व अध्यक्ष मुखी नानकचंद लखमाणी ने लखनऊ में सिंधी समाज द्वारा गीतापाठ एवं लोकसेवा केंद्र स्थापित कराने की जिम्मेदारी ली। इस अवसर पर आश्रम के वर्तमान पीठाधीश साईं हरीशलाल, आश्रम के सचिव किशनलाल, वरिष्ठ सेवादार भाई दर्शनलाल, मुखी सुदामचन्द चान्दवाणी, सुरेशलाल वलेचा आदि उपस्थित रहे।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button