New Tax Rules April 2026 :आम लोगों को समझाने MP और CG में चलाया जाएगा विशेष जागरूकता अभियान…

मध्यप्रदेश/ भोपाल : आयकर व्यवस्था को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और आसान बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार 1 अप्रैल से नया आयकर कानून लागू करने जा रही है। इस बदलाव को आम लोगों तक सरल भाषा में समझाने के लिए आयकर विभाग ने विशेष जनजागरूकता अभियान शुरू करने की तैयारी की है। इस अभियान का औपचारिक शुभारंभ केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण करेंगी। इसके बाद लगभग 3 माह तक देश के अलग-अलग राज्यों में सेमिनार, कार्यशालाएं और संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ भी शामिल हैं।
लोगों तक पहुंचाने का प्रयास…
इन कार्यक्रमों में विभागीय अधिकारी, चार्टर्ड अकाउंटेंट, टैक्स सलाहकार, विद्यार्थी और आम करदाता भाग लेंगे, ताकि नए कानून से जुड़ी जानकारी सीधे लोगों तक पहुंच सके। दरअसल भारत में पिछले लगभग 64 वर्षों से आयकर से संबंधित पुराना कानून लागू था। बदलती अर्थव्यवस्था, तकनीक और कर प्रणाली को देखते हुए सरकार ने इसे अधिक आधुनिक स्वरूप देने का निर्णय लिया है। हालांकि नए कानून में आयकर स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन नियमों और प्रक्रियाओं को काफी हद तक सरल बनाने की कोशिश की गई है।
नए कानून से करदाताओं को होगी आसानी…
सरकार का कहना है कि इस नए कानून से करदाताओं को नियम समझने में आसानी होगी और कानूनी उलझनों में भी कमी आएगी। नए प्रावधानों के तहत आयकर रिटर्न और संशोधित रिटर्न भरने के लिए पहले की तुलना में अधिक समय दिया जाएगा। इसके अलावा टैक्स रिफंड प्राप्त करने की प्रक्रिया को भी आसान बनाया गया है, जिससे करदाताओं को पैसा वापस मिलने में कम परेशानी होगी। टीडीएस करेक्शन स्टेटमेंट दाखिल करने की समय सीमा भी कम कर दी गई है। पहले इसमें छह साल तक सुधार किया जा सकता था, लेकिन अब यह अवधि घटाकर दो साल कर दी गई है।
कैरी फॉरवर्ड नियम भी पहले से सरल हुए…
घाटे को आगे के वर्षों में समायोजित करने यानी कैरी फॉरवर्ड करने के नियम भी पहले से सरल बनाए गए हैं। नए कानून में कुछ शब्दावली में भी बदलाव किया गया है। उदाहरण के लिए ‘असेसमेंट ईयर’ और ‘प्रीवियस ईयर’ की जगह अब ‘टैक्स ईयर’ शब्द का इस्तेमाल किया जाएगा। इसी तरह ‘लेजर’ की जगह ‘इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड’ शब्द शामिल किया गया है, जो डिजिटल प्रणाली को बढ़ावा देने की दिशा में कदम माना जा रहा है। इसके अलावा “प्रोफेशन” शब्द को भी स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है, जिससे बड़े पेशेवरों और सेवा क्षेत्र से जुड़े लोगों को भी स्पष्ट कर नियमों में शामिल किया जा सके।
कुछ मामलों में टीसीएस दरों में भी बदलाव…
कुछ आर्थिक गतिविधियों पर टैक्स कलेक्शन एट सोर्स (टीसीएस) की दरों में भी बदलाव किया गया है। शराब, स्क्रैप, कोयला, लिग्नाइट और लौह अयस्क जैसी वस्तुओं की बिक्री पर अब पहले की तुलना में अधिक टीसीएस लगाया जाएगा। इसके साथ ही शेयर बायबैक से मिलने वाली राशि पर भी नया कैपिटल गेन टैक्स लागू करने का प्रावधान किया गया है। नए नियमों के तहत आयकर जांच के मामलों में डिजिटल माध्यमों को भी महत्व दिया गया है। अब जांच के दौरान अधिकारियों को सोशल मीडिया अकाउंट और ई-मेल तक पहुंचने का अधिकार भी मिल सकता है



