छत्तीसगढ़

आध्यात्मिकता और आत्म-परिवर्तन से ही संभव है विश्व नवनिर्माण

– आध्यात्मिकता और आत्म-परिवर्तन से ही संभव है विश्व नवनिर्माण…

– महिला उत्थान से सशक्त होगा समाज…

– नारी शक्ति के आध्यात्मिक सशक्तिकरण से बनेगा श्रेष्ठ भारत…

रायपुर। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरी विश्व विद्यालय के महिला प्रभाग द्वारा महिला उत्थान आध्यात्मिक सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। विषय था ‘विश्व नवनिर्माण में महिलाओं की भूमिका’। इस गरिमामय कार्यक्रम में देश भर से आई वरिष्ठ ब्रह्माकुमारी बहनों के साथ ही अनेक समाजसेवी एवं प्रबुद्घ महिलाएं उपस्थित रहीं।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ब्रह्माकुमारीज़ महिला प्रभाग की अध्यक्ष एवं रूस स्थित सेवाकेन्द्रों की निदेशिका ब्रह्माकुमारी चक्रधारी दीदी ने कहा कि केवल भौतिक साधनों से सच्चा सुख और शांति प्राप्त नहीं हो सकती। जब मनुष्य देहभान से मुक्त होकर स्वयं को शांत व पवित्र आत्मा अनुभव करेगा तभी दिव्य संस्कारों वाले श्रेष्ठ समाज का पुनर्निर्माण संभव होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि परमपिता परमात्मा ने विश्व परिवर्तन का कार्य करने के लिए ज्ञान का कलश माताओं और बहनों को सौंपा है।

उन्होंने बतलाया कि रूस जैसे साम्यवादी देश में सनातन धर्म का प्रसार करना आसान नहीं था। वहाँ मांस और मछली के अलावा दूसरा कुछ खाते ही नहीं थे क्योंकि छ: माह वहाँ बर्फ पड़ती है तो सब्जी कहाँसे उगाते। इसलिए जब हम लोग राजयोग की शिक्षा देने के साथ-साथ शिक्षार्थियों को सात्विक भोजन बनाना भी सिखलाते थे। इस काम में उन्हें छ: माह लगे। अब तो चीन में भी हमारे राजयोग केन्द्र खुल चुके हैं।

माउंट आबू से पधारी ब्रह्माकुमारीज़ महिला प्रभाग की राष्ट्रीय संयोजिका डॉ. सविता दीदी ने कहा कि केवल विज्ञान, प्रौद्योगिकी या आर्थिक विकास ही सच्चा नवनिर्माण नहीं है बल्कि आंतरिक मूल्यों, नए संस्कारों और मानसिक शांति का संतुलन ही वास्तविक विकास है। उन्होंने कहा कि समाज रूपी गाड़ी के संचालन के लिए स्त्री और पुरुष दोनों पहियों का समान रूप से सशक्त होना आवश्यक है।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा ने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारियां सदैव से मानसिक रूप से अत्यंत सशक्त रही हैं। उन्होंने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धात्मक दौर में पाश्चात्य अंधी दौड़ से बचकर आध्यात्मिक चिंतन व आत्म-अवलोकन के माध्यम से ही परिवार और समाज में शांति और सामंजस्य स्थापित किया जा सकता है।

छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष एवं पूर्व महापौर किरणमयी नायक ने भी अपने व्यावहारिक अनुभवों को साझा करते हुए बेटों को संस्कारी बनाने और पारिवारिक संबंधों को एकजुट रखने में आध्यात्मिक दृष्टिकोण अपनाने की बात कही। साथ ही उन्होंने पारिवारिक खुशहाली और समरसता के लिए बेटों को भी घर के कार्यों और समायोजन (एडजस्टमेंट) के संस्कार देने पर जोर दिया।

शासकीय विज्ञान महाविद्यालय की प्रोफेसर एवं कलेक्टर की धर्मपत्नी सुनीता सिंह ने ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण का आधार परिवार होता है। महिला तथा पुरुष एक-दूसरे के पूरक हैं न कि प्रतिस्पर्धी। अध्यात्म व जन-कल्याणकारी संकल्पों से ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव है।

. इससे पूर्व रायपुर सेवा केंद्र संचालिका सविता दीदी ने अपने स्वागत भाषण में सभी आगत अतिथियों का आत्मीय अभिनंदन किया।

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने भी अपने विचार रखे। बालिकाओं ने स्वागत नृत्य प्रस्तुत किया। कु. शारदा नाथ ने स्वागत गीत गाया। मंच का संचालन नवा रायपुर की ब्रह्माकुमारी रश्मि दीदी ने किया।

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