Raipur : इन्दिरा गाँधी कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित आधुनिक जीवन शैली व तनावमुक्त जीवन पर विशेष व्याख्यान

– आधुनिक जीवन शैली व तनावमुक्त जीवन पर विशेष व्याख्यान…
– साईन्स के साथ साइलेंस का समन्वय ही तनाव मुक्त जीवन की कुंजी… ब्रह्माकुमारी गीता दीदी, भीनमाल
-अतीत की बातों को भूलकर वर्तमान में जीना सीखें…
– संवाद की कमी से पारिवारिक दूरियाँ तनाव पैदा कर रही है…
रायपुर, 12 जून 2026: आज के आधुनिक युग में जहाँ विज्ञान ने हमें असीमित साधन और सुविधाएँ दी हैं, वहीं मनुष्य मानसिक शांति और मानवीय संवेदनाओं से दूर होता चला गया है। आज के भागमभाग भरे जीवन में हम प्ले बटन दबाकर बिना किसी उद्देश्य के भाग रहे हैं। हम विराम (पॉज) लगाना भूल गए हैं। आज जीवन में तनाव इस कदर व्याप्त हो चुका है कि लोगों को तनाव न होने पर भी तनाव होने लगता है।

यह विचार भीनमाल (राजस्थान) की ब्रह्माकुमारी गीता दीदी ने इन्दिरा गाँधी कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित व्याख्यान सत्र में व्यक्त किए। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा आयोजित इस कार्यकम में कृषि विश्वविद्यालय की डीन आरती गुहा, विद्यार्थी कल्याण के डीन डॉ. संजय शर्मा और ब्रह्माकुमारी अदिति सहित बड़ी संख्या में कृषि वैज्ञानिक व छात्र उपस्थित थे।
उन्होंने आगे कहा कि आजकल हमारा जीवन हमेशा प्ले मोड पर रहता है और हम बिना किसी उद्देश्य के एक ऐसी दौड़ में भाग रहे हैं जिसका कोई अंत नहीं है। इस अंधी दौड़ ने समाज के हर वर्ग और हर उम्र के व्यक्ति को तनाव से भर दिया है। तनाव हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है।
उन्होंने तनाव के कारणों की चर्चा करते हुए यह स्पष्ट किया कि बहुत से लोग वर्तमान में जीने के बजाय अतीत की उन बातों का चिंतन करते रहते हैं जिन्हें बदलना संभव नहीं है। इसका सबसे अच्छा समाधान यह है कि जिन चीजों को आप बदल नहीं सकते उन्हें स्वीकार करे और जिन्हें स्वीकार नहीं कर सकते उन्हें बदलने का प्रयास करें। दुनिया में कोई भी ऐसा ताला नहीं बना जिसकी चाबी न हो। हर समस्या का समाधान मौजूद है। बस धैर्य की आवश्यकता है। श्रीमद् भगवत गीता का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि जो कुछ भी हुआ उसे खुशी से स्वीकार करना मन की शांति के लिए आवश्यक है।
ब्रह्माकुमारी गीता दीदी ने बतलाया कि वर्चुअल दुनिया और विंडो पर्सनालिटी का खतरा आज के युवाओं में बढ़ते तनाव का एक बड़ा कारण वर्चुअल वल्र्ड (आभासी दुनिया) है। लोग वास्तविक संबंधों से ज्यादा फेसबुक लाइक्स और सोशल मीडिया की दुनिया को महत्व दे रहे हैं। उन्होंने विंडो पर्सनालिटी (लोग क्या कहेंगे) की आलोचना करते हुए कहा कि आज लोग इस चिंता में अधिक रहते हैं कि लोग क्या कहेंगे। दूसरों के चश्मे से खुद को बेहतर दिखाने की कोशिश में तनाव को निमंत्रण दे रहे हैं। हमारा घर जहाँ आराम और खुलकर साझा करने की जगह होनी चाहिए थी वहाँ अब संवाद की कमी और संभलकर बोलने की मजबूरी ने तनाव बढ़ा दिया है। आधुनिक दिखावे और प्रतियोगिता की संस्कृति ने सामाजिक दबाव को इतना बढ़ा दिया है कि लोग शादियों और पार्टियों में भी केवल प्रदर्शन के लिए शामिल होते हैं।
उन्होंने तनाव से छुटकारा पाने के लिए कुछ व्यावहारिक सुझाए भी दिए-
१. सात्विक आहार और सादा जीवन सात्विक और शुद्ध शाकाहारी भोजन- यह तन और मन दोनों को स्वस्थ रखने में सहायक है। हम उस भोजन को फेंक देते हैं जिसमें एक बाल (केश) होता है, फिर उस भोजन को कैसे ग्रहण कर सकते हैं जिसमें किसी का लाल (संतान) होता है?
२. डिजिटल डिटॉक्स- सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल और अन्य डिजिटल उपकरणों से दूरी बनाना गहरी नींद और बेहतर मानसिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है।
३. अपने परिवार और मित्रों के साथ क्वालिटी टाइम बिताएं और अपनी भावनाओं को साझा करें।
४. मेडिटेशन (ध्यान) परमात्मा से जुडऩे और मौन का अभ्यास करने से निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है और मन हल्का महसूस करता है।



