छत्तीसगढ़

‘स्पिरिचुअल अवेकनिंग – द पावर बिहाइंड बिजनेस ग्रोथ’ संगोष्ठी में व्यापारियों ने सीखी सफलता के साथ शांति और संतुलन की कला…

आध्यात्मिक जागृति से ही व्यवसाय में स्थायी सफलता और समृद्धि संभव…

‘स्पिरिचुअल अवेकनिंग – द पावर बिहाइंड बिजनेस ग्रोथ’ संगोष्ठी में व्यापारियों ने सीखी सफलता के साथ शांति और संतुलन की कला…

भिलाई, 14 सितंबर 2026, छत्तीसगढ़। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, सेक्टर-7 स्थित पीस ऑडिटोरियम में व्यापार एवं उद्योग प्रभाग द्वारा “स्पिरिचुअल अवेकनिंग – द पावर बिहाइंड बिजनेस ग्रोथ” (आध्यात्मिक जागृति—व्यवसायिक विकास के पीछे की शक्ति) विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

भारत की समृद्ध विरासत को पुनः प्राप्त करना है — बीके क्रीना दीदी

मुंबई से पधारीं कॉरपोरेट ट्रेनर एवं विगत 40 वर्षों से ब्रह्माकुमारी संस्था में समर्पित ब्रह्माकुमारी क्रीना दीदी ने भारतीय मूल्यों एवं भारत की समृद्ध विरासत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत प्राचीन समय में अत्यंत समृद्ध देश था। भारत की चमक और समृद्धि को देखकर ही विदेशी आक्रांताओं ने व्यापार के बहाने भारत में प्रवेश किया और धीरे-धीरे हमें गुलाम बनाया।

उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है कि हम उस भारत की समृद्धि को पुनः प्राप्त करें। इसके लिए सबसे पहले हमें अपने जीवन का स्वयं लीडर बनना होगा। हम बहुत आसानी से अपनी परिस्थितियों और दूसरों को दोष दे देते हैं, लेकिन इसके बजाय हमें यह देखना चाहिए कि मुझमें क्या कमी है और मुझे अपने भीतर क्या परिवर्तन करना है। इस आत्मनिरीक्षण में आध्यात्मिकता हमारी मदद करती है।

उन्होंने कहा कि यदि बाहर की परिस्थितियां बदल गई हैं तो मुझे और भी मजबूत बनना है। परिस्थितियां कैसी भी हों, मुझे आगे बढ़ते रहना है। आध्यात्मिकता हमें हर दिन कुछ नया और नवीन अनुभव करने की शक्ति प्रदान करती है।

दूसरों का मानसिक और आर्थिक बोझ अपने ऊपर न लें..

बीके क्रीना दीदी ने कहा कि व्यापारिक जीवन में हमें किसी दूसरे व्यक्ति का मानसिक अथवा आर्थिक बोझ अपने ऊपर नहीं रखना चाहिए। जिस चीज अथवा परिस्थिति पर हमारा अधिकार नहीं है, उसे अपने मन पर बोझ बनाकर रखना स्वयं को कमजोर करना है। आध्यात्मिक जागृति हमें अपने मन को हल्का रखते हुए सकारात्मक ऊर्जा के साथ आगे बढ़ना सिखाती है।

परमात्मा को दिल से याद करें, सहयोग के मार्ग खुलते जाएंगे — बीके हरीश मेहता

मुंबई से पधारे सफल व्यापारी एवं उद्योग-व्यापार प्रभाग के नेशनल कोऑर्डिनेटर ब्रह्माकुमार हरीश मेहता ने कहा कि व्यापार में मुनाफे के साथ हम उसके छोटे भाई-बहन चिंता, तनाव और निराशा को भी अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लेते हैं।
उन्होंने कहा कि सुबह हम दोनों हाथ जोड़कर पूजा-पाठ करते हुए व्यापार की शुरुआत करते हैं, लेकिन यदि परमात्मा को सच्चे दिल से याद करें तो परमात्मा हजार हाथों से हमारी मदद करने के लिए तैयार रहता है।

उन्होंने कहा कि व्यापार में सफलता मिलने के साथ-साथ कई बार हमारे भीतर अहंकार और ईगो का पैरामीटर भी बढ़ता जाता है। तनाव, क्रोध और निरंतर भागदौड़ हमें अनेक समस्याओं से घेर लेती है। इसका समाधान राजयोग मेडिटेशन है, जिसकी आज हर व्यक्ति को आवश्यकता है।

कम बोलो, धीरे बोलो, मीठा बोलो और सोच-समझकर बोलो

बीके हरीश मेहता ने कहा कि जीवन में प्रेम, आनंद, शक्ति, ज्ञान, शांति और सुख की आवश्यकता है। ब्रह्माकुमारीज का संदेश है—“कम बोलो, धीरे बोलो, मीठा बोलो, सोच-समझकर बोलो और जरूरत हो तो ही बोलो।”

उन्होंने कहा कि हम भारतीयों की आदत है कि हम तुरंत प्रतिक्रिया दे देते हैं। इसके बजाय दूसरों को सुनना और सम्मान देना सीखना चाहिए। कार्यक्षेत्र में कोई न कोई ऐसा व्यक्ति अवश्य मिलेगा जो हमें पसंद नहीं होगा। ऐसे व्यक्ति को भी मन से शांति का दान देकर स्वीकार करना चाहिए।

पहाड़ जैसी बात को राई और राई को रुई समान हल्का बनाएं

उन्होंने कहा कि छोटी बात को बड़ा नहीं, बल्कि बड़ी बात को छोटा बनाना सीखना चाहिए। अर्थात पहाड़ जैसी बात को राई और राई जैसी बात को रुई समान हल्का बना देना ही जीवन जीने की कला है, जिसे आध्यात्मिकता हमें सिखाती है।
उन्होंने कहा कि कल क्या हुआ और कल क्या होगा, उसे छोड़कर आज को बेहतर कर्मों के साथ सफल बनाना चाहिए।

हमारी ईमानदारी और वैल्यूज ही हमारी कंपनी का विजिटिंग कार्ड हैं

अपने व्यापारिक जीवन की सफलता का अनुभव साझा करते हुए बीके हरीश मेहता ने कहा कि उन्होंने आज तक एक भी विजिटिंग कार्ड नहीं बांटा है। “हमारी कंपनी की ईमानदारी, निष्ठा और वैल्यूज ही हमारी कंपनी का विजिटिंग कार्ड हैं।”
उन्होंने कहा कि राजयोग मेडिटेशन से हमें अष्ट शक्तियों की प्राप्ति होती है, जो व्यापार एवं जीवन की अनेक परिस्थितियों में हमारी मदद करती हैं। अपने व्यापार को ईमानदारी और सच्चाई के साथ करना चाहिए, क्योंकि “सच्चाई की नाव हिलेगी, लेकिन कभी डूबेगी नहीं।”

व्यापार में प्रगति के साथ मन की शांति भी जरूरी — अजय भसीन

छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के महामंत्री अजय भसीन ने कहा कि हम सभी अपनी कमजोरियों को ताकत में बदलने का प्रयास करते हैं। व्यापारी बंधु निरंतर आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन जीवन में एक चीज का अभाव रह जाता है और वह है मन की शांति।

उन्होंने कहा कि ब्रह्माकुमारीज परिसर में कदम रखते ही मन की शांति का अनुभव होता है। ब्रह्माकुमारीज दीदियों का स्नेह एवं आशीर्वाद हम सभी पर सदैव बना रहता है। उन्होंने भिलाई के सभी व्यापारी बंधुओं की ओर से ब्रह्माकुमारी क्रीना दीदी का स्वागत किया।

बैंक बैलेंस बढ़ रहा है, लेकिन रिश्तों का बैलेंस तो नहीं बिगड़ रहा? — बीके आशा दीदी

कार्यक्रम की प्रेरणा स्रोत एवं भिलाई सेवा केंद्रों की निदेशिका राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी आशा दीदी जी ने कहा कि आज हर व्यक्ति प्रगति करना चाहता है, लेकिन वास्तविक समृद्धि तभी है जब उसमें परिवार, समाज और प्रकृति की भी समृद्धि निहित हो। यदि हम भीतर से समृद्ध और शांत होंगे, तभी रात को सुकून की नींद सो सकेंगे।

उन्होंने कहा कि “बैंक बैलेंस बढ़ रहा है, लेकिन यदि रिश्तों का बैलेंस बिगड़ रहा है तो हमें थोड़ा रुककर विचार करने की आवश्यकता है।” उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित सभी व्यापारी बंधुओं का हृदय से आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ उपस्थित अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया।

डिवाइन ग्रुप के बच्चों द्वारा सुंदर स्वागत नृत्य प्रस्तुत किया गया।

कार्यक्रम का सुंदर मंच संचालन वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी प्राची दीदी ने किया।

कार्यक्रम में बंसी अग्रवाल जी, भूपेंद्र जी सहित भिलाई के व्यापार एवं उद्योग जगत से जुड़े अनेक सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और संगोष्ठी का लाभ लिया।

राजयोग मेडिटेशन के अभ्यास के साथ हुआ समापन

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी व्यापारियों एवं अतिथियों को राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास कराया गया, जिससे सभी ने शांति, सकारात्मकता एवं आंतरिक शक्ति का अनुभव किया।

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