देश-विदेश

निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली का चाय की दुकान में फंदे से लटका मिला शव…

उत्तराखंड : देश के सबसे चर्चित और भयावह आपराधिक मामलों में शामिल ‘निठारी कांड’ के आरोपित रहे सुरेंद्र कोली ने उत्तराखंड के हरिद्वार में संदिग्ध परिस्थितियों में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली है। जेल से रिहा होने के बाद वह पिछले कुछ महीनों से हरिद्वार में चाय की दुकान चलाकर अपनी पहचान छिपाकर रह रहा था।

‎वर्ष 2006 में नोएडा के निठारी गांव से सामने आए बच्चों की हत्या और यौन उत्पीड़न के सीरियल कांड के प्रमुख आरोपी सुरेंद्र कोली का अंत बेहद नाटकीय और संदिग्ध परिस्थितियों में हुआ है। अदालत से बरी होने के बाद गुमनामी की जिंदगी बिता रहे कोली का शव शुक्रवार को हरिद्वार के एक चाय के खोखे में रस्सी के सहारे फंदे से लटका हुआ पाया गया।

चाय की दुकान में फंदे से लटका मिला शव…
‎हरिद्वार शहर कोतवाली क्षेत्र की सप्तऋषि पुलिस चौकी को सूचना मिली कि सप्त सरोवर रोड पर लालमाता मंदिर के सामने स्थित एक चाय की दुकान में किसी व्यक्ति ने फांसी लगा ली है। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को नीचे उतारा और तलाशी ली, जिसके बाद मृतक की पहचान सुरेंद्र कोली के रूप में हुई।

‎किराए पर खोखा लेकर चला रहा था गुजारा…
‎शहर कोतवाल कुंदन सिंह राणा ने बताया कि शुरुआती जांच में सामने आया है कि सुरेंद्र कोली पिछले कुछ महीनों से उत्तर हरिद्वार क्षेत्र में रह रहा था। उसने अपनी पुरानी पहचान छुपाकर एक छोटा सा चाय का खोखा किराए पर लिया था और वहीं से अपना जीवन यापन कर रहा था।

‎पुलिस के अनुसार घटना स्थल और दुकान से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। पुलिस ने अल्मोड़ा में रह रहे उसके परिजनों को सूचित कर दिया है और मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है।

निठारी कांड: फांसी की सजा से सुप्रीम कोर्ट से बरी होने तक का सफर

‎वर्ष 2006 में नोएडा के सेक्टर-31 स्थित मोनिंदर सिंह पंधेर की कोठी के पीछे नाले से बच्चों के कंकाल बरामद होने के बाद निठारी कांड का खुलासा हुआ था। पंधेर के नौकर सुरेंद्र कोली पर कई बच्चों के अपहरण, दुष्कर्म और हत्या के गंभीर आरोप लगे थे।

सीबीआई कोर्ट और हाईकोर्ट: सीबीआई की विशेष अदालत ने कोली को कई मामलों में फांसी की सजा सुनाई थी। हालांकि, बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उसकी दया याचिका में देरी और साक्ष्यों के अभाव के आधार पर फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला: कानूनी लड़ाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच में पाई गई गंभीर खामियों, साक्ष्यों की कमी और प्रक्रियात्मक कमियों का हवाला देते हुए सुरेंद्र कोली को सभी मामलों में बरी कर तुरंत रिहा करने का आदेश दिया था।

‎मामले की हर एंगल से पड़ताल में जुटी पुलिस
‎रिहाई के बाद से ही कोली मुख्यधारा और मीडिया की नजरों से दूर गुमनाम जिंदगी जी रहा था। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि खुदकुशी के पीछे कोई मानसिक तनाव, व्यक्तिगत कारण या कोई बाहरी दबाव तो नहीं था। पुलिस शव का पोस्टमार्टम करवाकर आगे की कानूनी कार्रवाई में जुट गई है।

‎क्या था देश को झकझोरने वाला बहुचर्चित निठारी कांड

‎​दिसंबर 2006 में नोएडा के सेक्टर-31 स्थित निठारी गांव में बिजनेसमैन मोनिंदर सिंह पंधेर की कोठी (D-5) के पीछे नाले से अचानक बच्चों के कंकाल और इंसानी अवशेष बरामद हुए थे, जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था।

‎जांच में सामने आया था कि पंधेर का नौकर सुरेंद्र कोली बहला-फुसलाकर मासूम बच्चों को कोठी के अंदर ले जाता था, जहां उनके साथ कुकर्म करने के बाद उनकी बेरहमी से हत्या कर दी जाती थी और शवों के टुकड़ों को नाले में फेंक दिया जाता था।

‎इस वीभत्स मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने कोली को कई मामलों में फांसी की सजा सुनाई थी। हालांकि, लंबी कानूनी लड़ाई के बाद साक्ष्यों की कमी और जांच में पाई गई गंभीर खामियों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने उसे बरी कर दिया था।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button