छत्तीसगढ़

बस्तर के वनांचल में बदलाव की बयार…‘मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना’ का सफल संचालन।

छत्तीसगढ़/ रायपुर : छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के घने वनांचलों के बीचोंबीच बसा बस्तर जिले के दरभा विकासखंड का खूबसूरत गांव कोलेंग अब अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ विकास की मुख्यधारा से जुड़ने की नई मिसाल पेश कर रहा है।

कभी दशकों तक लाल आतंक के खौफ और माओवादी प्रभाव के साए में कटे रहे इस वनांचल में बदलाव की बयार अब पूरी तरह स्थापित हो चुकी है। उस दौर में जहां न पक्की सड़कें थीं और न ही आवागमन का कोई साधन, वहां ‘मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना’ के तहत दौड़ती बसें ग्रामीणों के लिए एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक बन चुकी हैं।

नानगुर, चिंगपाल और कांगेर घाटी की हरी-भरी वादियों के बीच बसे कोलेंग को आपस में जोड़ने वाली यह नियमित बस सेवा अब अपने सफल संचालन का एक वर्ष पूरा कर चुकी है, जिससे पूरे क्षेत्र के जनजीवन में एक बड़ा और सकारात्मक परिवर्तन आया है।

विगत एक वर्ष से निर्बाध चल रही इस बस सेवा के नियमित यात्री सदाराम बघेल, गहुराम, तुलाराम नाग, तुलसीराम नाग, सुमन नाग और शांति नाग बताते हैं कि इस सुविधा ने उनके जीवन की पूरी तस्वीर बदल दी है। ग्रामीण याद करते हैं कि अतीत में सुरक्षा चिंताओं और अधोसंरचना के अभाव के कारण आवश्यक कार्यों, इलाज या साप्ताहिक हाट-बाजार के लिए भी कई किलोमीटर का जोखिम भरा सफर घने जंगलों के बीच से पैदल या असुरक्षित साधनों से तय करना पड़ता था। अब पिछले एक साल से तय समय पर बस की नियमित उपलब्धता से यात्रा सुरक्षित, सस्ती और भरोसेमंद बनी हुई है, जिससे ग्रामीणों के समय, श्रम और धन की भारी बचत हो रही है।

इस क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बहाली के साथ पक्की सड़कों के निर्माण और एक वर्ष से जारी सार्वजनिक बस सेवा के तालमेल ने दरभा क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक ताने-बाने को नई मजबूती दी है। स्थानीय किसान और वनोपज संग्राहक अपनी उपज को बिना किसी बिचौलिए या देरी के सीधे बड़े बाजारों तक पहुंचाकर उचित मूल्य पा रहे हैं, जिससे उनकी आजीविका में सुधार हुआ है।

इसके साथ ही गांव के छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा संस्थानों और गंभीर मरीजों को स्वास्थ्य केंद्रों तक समय पर पहुंचाने में इस बस सेवा ने पिछले बारह महीनों में एक जीवनरेखा की भूमिका निभाई है। दशकों के अलगाव और खौफ के दौर को पीछे छोड़ते हुए कोलेंग निवासी तुलाराम नाग और आसपास के अन्य ग्रामीण शासन की इस संवेदनशील पहल की सराहना कर रहे हैं।

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