छत्तीसगढ़

वन्यजीव संरक्षण सप्ताह के तहत कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान को प्लास्टिक मुक्त बनाने की दिशा में शुरू हुआ अभियान

छत्तीसगढ़/जगदलपुर : वन्यजीव संरक्षण सप्ताह के तहत कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान को प्लास्टिक मुक्त बनाने की दिशा में अभियान शुरू किया गया है। बुधवार को ‘प्लास्टिक मुक्त कांगेर घाटी’ अभियान का शुभारंभ हुआ। इसके तहत कुटुमसर गुफा और तीरथगढ़ पर्यटन क्षेत्र में व्यापक सफाई अभियान चलाकर प्लास्टिक सहित अन्य कचरा हटाया गया।

राष्ट्रीय उद्यान प्रबंधन ने आगामी 1 जनवरी से पहले कांगेर घाटी को प्लास्टिक मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है। अभियान को केवल एक दिन की सफाई तक सीमित न रखते हुए पर्यटकों, स्थानीय समुदाय और पर्यटन से जुड़े लोगों की लगातार भागीदारी सुनिश्चित करने की योजना बनाई गई है।

कुटुमसर और तीरथगढ़ में हुई सफाई… 

अभियान के दौरान कुटुमसर में गुफा परिसर से मुख्य प्रवेश द्वार तक सफाई की गई। वहीं तीरथगढ़ में पार्किंग क्षेत्र से जलप्रपात परिसर तक, आसपास के रास्तों और नेचर ट्रेल के अलग-अलग हिस्सों में कचरा एकत्र किया गया। सफाई अभियान में राष्ट्रीय उद्यान के अधिकारी-कर्मचारियों के साथ स्थानीय ग्रामीण, गाइड, सरपंच, ईडीसी सदस्य, जिप्सी प्रबंधन समिति, पर्यटन विकास समिति और बम्बू राफ्टिंग समिति के सदस्य शामिल हुए। रेडक्रॉस और भारतीय मानव विज्ञान सर्वेक्षण समेत विभिन्न संस्थाओं से जुड़े लोगों ने भी अभियान में सहभागिता की।

प्लास्टिक वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा… 

कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के निदेशक गौतम नारायण पडिभार ने अभियान के दौरान प्लास्टिक से पर्यावरण और वन्यजीवों को होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्लास्टिक लंबे समय तक नष्ट नहीं होता और पर्यावरण में बना रहता है। जंगलों में इसका अनुचित निपटान वन्यजीवों और घरेलू पशुओं के लिए खतरनाक हो सकता है। कई बार पशु प्लास्टिक को भोजन समझकर निगल लेते हैं, जिससे उनके पाचन तंत्र पर गंभीर असर पड़ सकता है और स्थिति जानलेवा भी हो सकती है। उन्होंने लोगों से रोजमर्रा की जिंदगी में प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करने और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प अपनाने की अपील की।

प्रतिभागियों ने ली प्लास्टिक त्याग की शपथ… 

अभियान के दौरान मौजूद लोगों ने कांगेर घाटी को प्लास्टिक मुक्त बनाने की शपथ ली। प्रतिभागियों ने जंगल, जलस्रोत, वन्यजीव और जैव विविधता की सुरक्षा के साथ प्लास्टिक का उपयोग घटाने और कचरे के उचित निपटान में सहयोग करने का संकल्प लिया।

पर्यटन स्थलों से आगे बढ़ेगी मुहिम… 

राष्ट्रीय उद्यान प्रबंधन के अनुसार, यह पहल सिर्फ कुटुमसर गुफा और तीरथगढ़ जैसे पर्यटन स्थलों की सफाई तक सीमित नहीं रहेगी। अभियान के जरिए स्थानीय समुदाय, युवा, पर्यटन से जुड़े हितधारक, विभिन्न विभाग और प्रकृति प्रेमियों को लगातार जोड़ा जाएगा।

 प्रबंधन ने पर्यटकों से की अपील… 

उद्देश्य लोगों के व्यवहार में बदलाव लाना और कांगेर घाटी में प्लास्टिक कचरे को न्यूनतम स्तर तक पहुंचाना है। प्रबंधन ने पर्यटकों से भी अपील की है कि वे पर्यटन स्थलों पर प्लास्टिक या अन्य कचरा न फेंकें और निर्धारित व्यवस्था के अनुसार उसका निपटान करें।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button