अभिनेता पंकज धीर के निधन पर छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने जताया शोक…भारतीय सिनेमा और टेलीविजन जगत में उनका योगदान अविस्मरणीय रहेगा।”

रायपुर/मुम्बई : प्रसिद्ध अभिनेता पंकज धीर के निधन पर छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने गहरा शोक व्यक्त किया है।
उन्होंने कहा कि “महाभारत” में कर्ण की भूमिका निभाकर अमर हुए पंकज धीर का जाना भारतीय कला, संस्कृति और मनोरंजन जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। अरुण साव ने अपने शोक संदेश में कहा, “महाभारत में कर्ण के रूप में पंकज धीर ने जो अद्भुत अभिनय किया, वह भारतीय टेलीविजन के इतिहास में सदैव याद रखा जाएगा। उनके अभिनय में जो गंभीरता, भावनात्मक गहराई और निष्ठा थी, उसने इस किरदार को जीवंत बना दिया था। भारतीय सिनेमा और टेलीविजन जगत में उनका योगदान अविस्मरणीय रहेगा।”
उन्होंने कहा कि पंकज धीर न केवल एक कुशल अभिनेता थे, बल्कि एक सादगीपूर्ण और संवेदनशील व्यक्तित्व के धनी भी थे। उन्होंने अपने अभिनय के जरिए कई पीढ़ियों के दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी। साव ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए कहा, “ईश्वर पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोक संतप्त परिवार को यह दुख सहने की शक्ति प्रदान करें। ॐ शांति।” भारतीय मनोरंजन जगत में शोक की लहर पंकज धीर के निधन की खबर से पूरे फिल्म और टेलीविजन जगत में शोक की लहर है।
उन्होंने अपने करियर में “महाभारत” के अलावा “बॉर्डर”, “घातक”, “तिरंगा”, “हम” जैसी फिल्मों में भी यादगार भूमिकाएं निभाईं। टीवी पर उनकी लोकप्रियता इतनी अधिक थी कि कर्ण के किरदार को आज भी लोग उसी गंभीरता और आदर के साथ याद करते हैं। उनके बेटे निकीतेन धीर भी एक सफल अभिनेता हैं और कई फिल्मों में खलनायक की भूमिकाएं निभा चुके हैं। पंकज धीर ने अपने जीवनकाल में कई युवा कलाकारों को मार्गदर्शन दिया और अभिनय प्रशिक्षण संस्थान “अभिनेता स्टूडियो” के माध्यम से नई पीढ़ी के कलाकारों को प्रशिक्षित किया।
छत्तीसगढ़ में भी लोकप्रिय थे पंकज धीर…
छत्तीसगढ़ के दर्शकों में भी पंकज धीर का नाम बेहद सम्मान के साथ लिया जाता था। उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि उनके द्वारा निभाए गए पात्रों ने देशभर में लोगों के मन में धर्म, साहस और निष्ठा के प्रति सम्मान की भावना जगाई। राज्य सरकार के कई मंत्रियों, जनप्रतिनिधियों और कला-जगत से जुड़े लोगों ने भी अभिनेता के निधन पर शोक व्यक्त किया है। पंकज धीर का जाना भारतीय टेलीविजन इतिहास के एक स्वर्णिम अध्याय का अंत माना जा रहा है। कला प्रेमियों का कहना है कि “कर्ण” के रूप में उनकी पहचान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनकर रहेगी।



