छत्तीसगढ़

नक्सल पीड़ित परिवार का एक संवेदनशील मामला सामने आया. जो नगर पालिका की निष्पक्षता पर लगा रहा गंभीर प्रश्नचिह्न?

छत्तीसगढ़/ राजनंदगांव: धर्मनगरी डोंगरगढ़ इन दिनों नगर पालिका परिषद की कार्यशैली को लेकर सुर्खियों में है। आरोप है कि पालिका प्रशासन गरीब दुकानदारों पर कठोर कार्रवाई कर रहा है, जबकि मोबाइल टावर कंपनियों जैसे रसूखदारों पर नरम रवैया अपना रहा है। मामला किराया वसूली से जुड़ा है, जहां नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) की कार्यप्रणाली पर स्थानीय लोगों ने सवाल उठाए हैं।

मोबाइल टावरों पर 20 लाख से अधिक बकाया?

जानकारी के अनुसार, नगर पालिका क्षेत्र में लगे मोबाइल टावरों से लगभग ₹20 लाख से अधिक का किराया वर्षों से बकाया है। इसके बावजूद पालिका प्रशासन ने इनके खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया, वहीं दूसरी ओर, गरीब दुकानदारों पर बकाया किराया के नाम पर दुकानें सील की जा रही हैं जिससे स्थानीय जनता में रोष फैला है।

नक्सल पीड़ित की दुकान बिना नोटिस सील…
सबसे चिंताजनक मामला करबला चौक का है, जहाँ नक्सल पीड़ित परिवार की दुकान को बिना नोटिस सील कर दिया गया। यह दुकान धीरेन्द्र साहू की है, जो 2006 में नक्सली हिंसा की चपेट में आए थे, शासन-प्रशासन ने पुनर्वास योजना के तहत उन्हें यह दुकान जीवनयापन के लिए दी थी, लेकिन अब किराया बकाया का हवाला देकर दुकान सील कर दी गई।

पीड़ित धीरेन्द्र साहू का कहना है कि, ‘हम नक्सल पीड़ित हैं, सरकार ने दुकान दी थी ताकि जीवन चल सके, आज बिना नोटिस दुकान सील कर दी गई यहाँ तक की अधिकारी से मिलने गए तो उन्होंने बात तक नहीं सुनी।’ इसके अलावा धीरेन्द्र ने बताया कि वे कुछ दिनों की मोहलत मांगने खुद पालिका कार्यालय गए थे, परंतु सीएमओ खिलेंद्र भोई ने मिलने से इंकार कर दिया और उन्हें दफ्तर से बाहर निकाल दिया।

सभी पर समान कार्रवाई की जा रही है’- पालिका का पक्ष

मुख्य नगर पालिका अधिकारी खिलेंद्र भोई ने इस पूरे मामले में किसी भी भेदभाव से इनकार किया और कहा कि सभी से समान रूप से किराया वसूली की जा रही है चाहे वह दुकानदार हों या टावर मालिक।

जिस पर डोंगरगढ़ के मुख्य नगर पालिका अधिकारी खिलेंद्र भोई ने बोला, ‘नगर पालिका किसी के साथ पक्षपात नहीं कर रही है सभी से वसूली समान रूप से की जा रही है’ भोई ने बताया कि एक टावर से ₹2 लाख की वसूली की जा चुकी है और शेष टावरों को तीन नोटिस भेजे गए हैं। साथ ही एसडीएम से आगे की कार्रवाई के लिए अनुरोध किया गया है।

अब संवेदनशीलता पर उठे सवाल…
यह पूरा मामला सिर्फ प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना का भी विषय बन गया है। नक्सल पीड़ितों के पुनर्वास के लिए सरकार “नक्सल पीड़ित सहायता एवं पुनर्वास योजना” पर करोड़ों रुपये खर्च करती है, लेकिन जब इन्हीं लाभार्थियों के साथ ऐसा व्यवहार हो, तो योजना की भावना पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।

क्या रसूखदारों के दबाव में निर्णय लिए जा रहे हैं?
मोबाइल टावर संचालकों के करोड़ों के बकाये के बावजूद नरमी और गरीब दुकानदार की दुकान सील करने की कार्रवाई- नगर पालिका की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रही है यहाँ तक कि,अब जनता पूछ रही है- क्या डोंगरगढ़ नगर पालिका सच में समान न्याय कर रही है या फिर रसूखदारों के दबाव में निर्णय लिए जा रहे हैं?

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