धर्म-आध्यात्म

अंतरराष्ट्रीय संबंधों में विश्व एक परिवार की भावना हो तो युद्ध नहीं हो सकता: केंद्रीय मंत्री उइके

आबूरोड (राजस्थान)। ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय शांतिवन में चल रहे वैश्विक शिखर सम्मेेलन प्लेनरी सेशन में अतिथि के रूप में केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री दुर्गादास उइके, मध्यप्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय मुख्य रूप से मौजूद रहे।

अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और पारस्परिक विश्वास के माध्यम से युद्ध की रोकथाम: शांति एवं सद्भाव के उत्प्रेरक के रूप में मीडिया विषय पर संबोधित करते हुए भारत सरकार के केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री दुर्गादास उइके ने कहा कि मानवता के कल्याण के लिए ऐसे आयोजन बहुत जरूरी हैं। देश का आंतरिक स्वास्थ्य और विश्व का आंतरिक स्वास्थ्य इस समय ठीक नहीं है। दोनों ही स्थितियां ठीक नहीं हैं। आज का युद्ध केवल हथियारों का नहीं बल्कि विचारों, मतभेद और अविश्वास का युद्ध है। जब राष्ट्र समाज या व्यक्ति संवाद की जगह जहां संवाद, समन्वय और सामंजस्य स्थापित होना चाहिए वहां संदेह और स्वार्थ को प्राथमिकता देने की वजह से विविध प्रकार के युद्ध जन्म ले रहे हैं। युद्ध किसी का समाधान नहीं है। युद्ध विकास और मानवीय संवेदना को नष्ट करता है। इसलिए हमें युद्ध की जड़ अविश्वास और अहंकार को समाप्त करने की दिशा में ब्रह्माकुमारीज़ आश्रम के माध्यम से हमारी शक्तिस्वरुपा, देवी स्वरूपा बहनों के माध्यम से आने वाले सुखद भविष्य की कल्पना प्रतिष्ठित होने वाली है। ब्रह्माकुमारीज़ संस्था का भी मूल संदेश भी यही है कि एक परमात्मा की संतान होने का बोध ही विश्व को एक परिवार बनाता है। यदि यह भावना हमारे अंतरराष्ट्रीय संबंधों को आधार बन जाए तो युद्ध की कोई आवश्यकता ही नहीं है। चेतना को जगाने का कार्य ब्रह्माकुमारी बहनें कर रही हैं। मीडिया चाहे तो नफरत को हवा दे सकता है व विश्वास और सद्भाव का सेतु भी बन सकता है।

युद्ध का नाम आते ही सिहरन आ जाती है-

मध्यप्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि युद्ध का नाम आते ही सिहरन आ जाती है। हमने राम और रावण का युद्ध पढ़ा है। महाभारत में कौरव पांडव का युद्ध देखा है। कृष्ण ने कहा था दुर्योधन युद्ध से किसी का लाभ नहीं है। केवल पांच गांव दे दो, युद्ध टाल दो। युद्ध होने के कई कारण हैं। एक बार हम तय कर लें कि हम आपस मे भाई-भाई हैं तो शायद युद्ध लड़ने की जरूरत नहीं है। दुनिया आज विश्वयुद्ध के मुहाने पर खड़ी है। संयुक्त राष्ट्र संघ आज कठपुतली हो गया है। ताकतवर देशों के सामने बौना हो गया है। जिस उद्देश्य के लिए संयुक्त राष्ट्र का गठन किया गया था उस पर पुनर्विचार की आवश्यकता है। आज भारत की परंपरा पर विचार करने की जरूरत है। हम किसी को दुख देना नहीं चाहते। किसी को दुखी देखना नहीं चाहते हैं।

हमारा लक्ष्य वसुधैव कुटुम्बकम है-

विजयवर्गीय ने कहा कि तुर्किये पर जब संकट आया तो सबसे पहले मदद भेजने वाला देश भारत था। जबकि तुर्किये भारत विरोधी था, तब भी हमने इसकी परवाह नहीं की। 100 से ज्यादा देशों को वैक्सीन भेजने का काम भारत ने किया। पुतिन को पीएम मोदी ने कहा कि ये युद्ध का समय नहीं है, युद्ध से विनाश ही मिलता है। यदि विश्वयुद्ध होगा तो मानवता का क्या होगा? आर्थिक संपन्नता और व्यापार हमारा लक्ष्य नहीं है। हमारा लक्ष्य वसुधैव कुटुम्बकम है। ब्रह्माकुमारीज़ इस दिशा में महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। इस संस्थान में पूर्णकालिक समर्पित बहनें हैं। विश्व में महिला सशक्तिकरण का कोई केंद्र है तो वह ब्रह्माकुमारीज़ है। ऐसे संगठन ही विश्व में युद्ध को रोक सकते हैं। ब्रह्माकुमारीज़ में जितनी भी बहनें काम कर रही हैं, वह शक्तिपुंज हैं। यह भाईचारे, शांति, सद्भाव का संदेश दे रहीं हैं।

इन्होंने भी व्यक्त किए विचार-
गुजरात के राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. वल्लभभाई कथीरिया को मानवता के संरक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। विजयनगरम के सांसद अप्पलानैदु कालीसेट्टी, चीन शंघाई से आए अदानी समूह के चीन संचालन प्रमुख अक्षय माथुर, संयुक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी बीके संतोष दीदी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। जयपुर सबजोन की निदेशिका राजयोगिनी बीके सुषमा दीदी ने राजयोग ध्यान से शांति की गहन अनुभूति कराई। स्वागत भाषण इंदौर ज़ोन (मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़) की प्रभारी राजयोगिनी बीके हेमलता दीदी ने दिया। संचालन शिक्षा प्रभाग की राष्ट्रीय समन्वयक बीके सुमन दीदी ने किया। आभार मेडिकल विंग के सचिव बीके डॉ. बनारसी भाई ने माना।

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