केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल ,भरनी, बिलासपुर में जवानों के लिए नशा मुक्ति तनाव मुक्त कार्यशाला का आयोजन

उसलापुर ,बिलासपुर 12 जून, वर्तमान समय भागदौड़ की जिंदगी में मानव अपनी आंतरिक शक्तियों को भूलता जा रहा है जिसके कारण अनेक मानसिक रोग पैदा होते जा रहे हैं आज के मानव को स्वयं की पहचान नहीं होने के कारण अनेक मानसिक, शारीरिक विकृतियों जन्म लेती जा रही है ।आज पूरा विश्व में चिंता, भय ,तनाव ,आत्महत्या अनिद्रा के रोग बढ़ते जा रहे हैं। इसके कारण अनेक दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं। ज्यादा सोचने की आदत से मन दिन प्रतिदिन कमजोर नकारात्मक बनता जा रहा है। हमारे शरीर की दिनचर्या भी असंतुलित होती जा रही है। गलत खानपान, गलत टाइम पर सोना, नकारात्मक सोच इन सभी का प्रभाव हमारे दैनिक जीवन पर पड़ता जा रहा है ।हमारे विवेक शक्ति कमजोर होती जा रही है। जिससे हम अच्छे सकारात्मक सोचने की क्षमता खत्म होती जा रही है, अनेक रोग बढ़ते जा रहे हैं। इन सभी का समाधान आध्यात्मिकता व मेडिटेशन में है।
यह विचार ब्रह्मा कुमार नारायण भाई जीवन जीने की कला की विशेषज्ञ केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल भारती बिलासपुर में जवानों के लिए नशा व तनाव मुक्त कार्यशाला में संबोधित करते हुए बताया।


इस अवसर पर सेवा केंद्र संचालिका ब्रह्माकुमारी छाया बहन ने बताया कि मेडिटेशन में मन हमारा सत्य परमात्मा से जुट जाता है तो परमात्मा से हमें शांति खुशी प्रेम आनंद की वाइब्रेशंस आत्मा को प्राप्त होते हैं वह तरंगे मन को शक्तिशाली बनाती है और मन शरीर के अंगों को शक्तिशाली बनाता है। राजयोग से ही हर बीमारियों का समस्याओं का समाधान मिलता है राजयोग अपनी स्वयं की चेतन को परमात्मा पिता से जोड़ना इसे ही हम शारीरिक मानसिक स्वास्थ्य प्राप्त कर सकते हैं । मेडिटेशन से जो अंदर के आनंद की प्राप्ति होती है वह आनंद हमें बाहरी नशे से दूर कर देता है। कई अधिकारी ने लाभ लिया।

कमलेश कुमार साहू सहायक कमांडेंट केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल ने आभार व्यक्त करते हुए बताया कि अपने दैनिक जीवन में राजयोग मेडिटेशन का महत्वपूर्ण रोल होता है। जिससे हम शारीरिक मानसिक रीति से संपूर्ण रीति स्वास्थ्य को प्राप्त कर सकते हैं। हमारा मनोबल बढ़ने से बड़े से बड़े कार्य भी सरल सहज होने लगते हैं। कार्यक्रम में वासुदेव सहायक कमांडेंट, कुणाल स्वामी सहायक कमांडेंट व अनेक अधिकारी व सैनिक उपस्थित थे।,
भ्राता तेजपाल सहायक इंस्पेक्टर ने बताया की नशा हमारे जीवन, मस्तिष्क को खोखला बनता है । कोई भी नशा हानिकारक होता है। हैं आज के मानव को स्वयं की पहचान नहीं होने के कारण अनेक मानसिक, शारीरिक विकृतियों जन्म लेती जा रही है ।आज पूरा विश्व में चिंता, भय ,तनाव ,आत्महत्या अनिद्रा के रोग बढ़ते जा रहे हैं ।इसके कारण अनेक दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं। ज्यादा सोचने की आदत से मन दिन प्रतिदिन कमजोर नकारात्मक बनता जा रहा है। हमारे शरीर की दिनचर्या भी असंतुलित होती जा रही है। गलत खानपान, गलत टाइम पर सोना, नकारात्मक सोच इन सभी का प्रभाव हमारे दैनिक जीवन पर पड़ता जा रहा है ।हमारे विवेक शक्ति कमजोर होती जा रही है। जिससे हम अच्छे सकारात्मक सोचने की क्षमता खत्म होती जा रही है, अनेक रोग बढ़ते जा रहे हैं। इन सभी का समाधान आध्यात्मिकता व मेडिटेशन में है।



