छत्तीसगढ़

सिस्टर प्रीति मेरी और सिस्टर वंदना फ्रांसिस, पास्टर सुखमन मंडावी को एनआईए कोर्ट से मिली जमानत…

छत्तीसगढ़/रायपुर: बिलासपुर स्थित राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) कोर्ट ने शनिवार को कथित मानव तस्करी और मतांतरण के मामले में गिरफ्तार दो कैथोलिक ननों—सिस्टर प्रीति मेरी और सिस्टर वंदना फ्रांसिस—तथा पास्टर सुखमन मंडावी को जमानत दे दी। एनआईए कोर्ट के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सिराजुद्दीन कुरैशी ने शुक्रवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था और आज जमानत मंजूर की। ननों की गिरफ्तारी के बाद यह मामला छत्तीसगढ़ से लेकर केरल और दिल्ली तक सियासी तूफान का केंद्र बना हुआ था।

क्या है पूरा मामला… 

25 जुलाई को दुर्ग रेलवे स्टेशन पर बजरंग दल के कार्यकर्ता रवि निगम की शिकायत पर रेलवे पुलिस ने सिस्टर प्रीति मेरी, सिस्टर वंदना फ्रांसिस और सुखमन मंडावी को गिरफ्तार किया था। इन पर नारायणपुर जिले की तीन आदिवासी युवतियों को जबरन मतांतरण और मानव तस्करी के लिए आगरा ले जाने का आरोप था। दोनों नन केरल की अस्सीसी सिस्टर्स ऑफ मैरी इम्मैकुलेट से जुड़ी हैं और आगरा के एक अस्पताल में सेवा कर रही थीं। आरोप था कि वे तीनों युवतियों (18-22 वर्ष) को आगरा में ले जा रही थीं।

कोर्ट में दलीलें और जमानत… 

शुक्रवार को एनआईए कोर्ट में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील अमृतो दास ने दावा किया कि तीनों युवतियां बालिग हैं और उनके परिवार कई वर्षों से ईसाई धर्म का पालन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि FIR केवल “आशंकाओं” पर आधारित है और पुलिस के पास कोई ठोस सबूत नहीं है। विशेष लोक अभियोजक दौलाराम चंद्रवंशी ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि जांच प्रारंभिक चरण में है। हालांकि, कोर्ट ने सबूतों के अभाव और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए तीनों आरोपियों को जमानत दे दी।

ननों की गिरफ्तारी के बाद मचा सियासी बवाल…

ननों की गिरफ्तारी के बाद छत्तीसगढ़, केरल और दिल्ली में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए। लोकसभा और राज्यसभा में यह मुद्दा जोर-शोर से उठा। केरल से कांग्रेस, सीपीआई(एम) और केरल कांग्रेस के सांसदों ने इसे अल्पसंख्यकों के खिलाफ लक्षित कार्रवाई करार दिया। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इसे “गंभीर अन्याय” बताया, जबकि सीपीआई(एम) की बृंदा करात ने गिरफ्तारी को “असंवैधानिक” और “फर्जी” करार देते हुए FIR रद्द करने की मांग की।

केरल से पांच सांसदों—जॉन ब्रिटास, जोस के मणि, पी संतोष, चंडी ओमेन और सनी जोसेफ—का प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को ननों से मिलने दुर्ग जेल पहुंचा। सांसद हिबी ईडन ने कहा, “यह फर्जी केस है। सरकार ने ननों को साजिश के तहत जेल में डाला।” मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने भी इस मामले को रद्द करने की अपील की।

कानून अपना काम कर रहा है…

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा, “कानून अपना काम कर रहा है। अदालत का फैसला मान्य होगा।” वहीं, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने मतांतरण को सामाजिक ताने-बाने के लिए खतरा बताया। दूसरी ओर, कांग्रेस और वाम दलों ने इसे सांप्रदायिक सौहार्द के खिलाफ कार्रवाई करार दिया।

जमानत के बाद ननों की रिहाई से मामला शांत होने की उम्मीद है, लेकिन राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर यह विवाद अभी थमने का नाम नहीं ले रहा। केरल में एलडीएफ और यूडीएफ ने अलग-अलग विरोध प्रदर्शन किए, जबकि कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने संसद में केंद्र से हस्तक्षेप की मांग की। यह मामला धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यक अधिकारों पर बहस को और तेज कर सकता है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button