विश्व पृथ्वी दिवस पर अरण्य भवन में हुआ परिचर्चा का आयोजन…धरती को स्वच्छ रखने और पर्यावरण सरंक्षण का लिया संकल्प…

– अरण्य भवन में विश्व पृथ्वी दिवस पर कार्यक्रम हुआ…
– पृथ्वी को बचाने के लिए जंगल को बचाना होगा…श्रीनिवास राव, वन बल प्रमुख
– हरेक को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी… अरूण कुमार पाण्डे, प्रधान मुख्य वन सरंक्षक
– सभी ने धरती को स्वच्छ रखने और पर्यावरण सरंक्षण का लिया संकल्प…
नवा रायपुर, 22 अप्रैल 2026: छत्तीसगढ़ शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग और प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के ग्राम विकास प्रभाग द्वारा संयुक्त रूप से विश्व पृथ्वी दिवस पर नवा रायपुर स्थित अरण्य भवन में परिचर्चा आयोजित की गई जिसमें वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के प्रधान मुख्य वन सरंक्षक एवं वन बल प्रमुख श्रीनिवास राव, प्रधान मुख्य वन सरंक्षक एवं मुख्य वन्यप्राणी सरंक्षक अरूण कुमार पाण्डे, ब्रह्माकुमारी सविता दीदी, रश्मि दीदी, अपर प्रधान मुख्य वन सरंक्षक (भूप्रबन्ध) सुनील कुमार मिश्रा, अपर प्रधान मुख्य वन सरंक्षक (प्रशासन) श्रीमती शालिनी रैना सहित बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया।
इस अवसर पर बोलते हुए वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के प्रधान मुख्य वन सरंक्षक एवं वन बल प्रमुख श्रीनिवास राव ने ब्रह्माकुमारी संस्थान की सराहना करते हुए कहा कि मेडिटेशन से स्वच्छ आचरण, स्वच्छ व्यवहार और स्वच्छ पर्यावरण में मदद मिलती है। हमारी पृथ्वी जीवित लोगों के लिए जीवन्त ग्रह है। हमारे लिए यह एक ही धरती है। जीवित रहने के लिए और कोई दूसरा ग्रह नहीं है। इसलिए हमें अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। जागरूक होकर संसाधनों का सदुपयोग करना होगा। हमें पृथ्वी को बचाना है तो जंगल को बचाना होगा।
प्रधान मुख्य वन सरंक्षक एवं मुख्य वन्यप्राणी सरंक्षक अरूण कुमार पाण्डे ने कहा कि पर्यावरण को जो नुकसान हो चुका है उसे तो हम नहीं बदल सकते हैं लेकिन अब हमें अपनी जिम्मेदारी उठानी होगी। कभी भी पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने का कार्य न करें। धरती के प्रति कृतज्ञता का भाव रखें। पर्यावरण कोई समस्या नहीं है। समस्या हम स्वयं हैं। हरेक को पर्यावरण की रक्षा करने में अपना योगदान देना होगा। पेड़ लगाना होगा।
रायपुर केन्द्र की संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने कहा कि यह सोचने की बात है कि हमें विश्व पृथ्वी दिवस मनाने की जरूरत क्यों पड़ी? एक समय था कि संसार का वायुमण्डल शुद्घ था। नदियों का पानी स्वच्छ था। प्रकृति हमारी सारी जरूरतों को पूरा कर रही थी। लेकिन हमने अपने स्वार्थवश इसे प्रदूषित कर दिया। लोग प्रकृति का दोहन अपने स्वार्थ के लिए करने लगे हैं। इन दिनों ब्रह्माकुमारी संस्था बिना रसायनिक खाद के जैविक खेती पर बहुत काम कर रही है। हमारी संस्थान से जुड़े किसानों ने जब जैविक खेती की शुरूआत की तो उनकी पैदावार प्रति एकड़ डेढ़ गुणा बढ़ गई। इससे मिट्टी की गुणवत्ता में भी बहुत सुधार देखा गया।
इससे पहले परिचर्चा की शुरूआत करते हुए ब्रह्माकुमारी रश्मि दीदी ने बतलाया कि धरती को प्रदूषण मुक्त और सुरक्षित करने के लिए विश्व पृथ्वी दिवस की शुरूआत वर्ष 1970 में अमेरिका में हुई। प्रकृति को प्रभु का उपहार समझकर उपयोग करें तो उसका दुरूपयोग रूक जाएगा। प्रदूषण बढऩे का प्रमुख कारण मानसिक प्रदूषण है।
अन्त में ब्रह्माकुमारी रिंकू दीदी ने सभी को राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास कराया। कार्यक्रम का संचालन ब्रह्माकुमारी रूचिका दीदी ने किया।



