ब्रह्माकुमारीज़ के पांच दिवसीय चौथे माइंड-मनी-मैनेजमेंट राष्ट्रीय सेवा सम्मेलन का हुआ शुभारंभ

– परमात्म स्मृति सही निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करती है: राजयोगिनी बीके मुन्नी दीदी
– चौथे माइंड-मनी-मैनेजमेंट राष्ट्रीय सेवा सम्मेलन का शुभारंभ
– फाइनेंस, एकाउंट, टैक्सेशन से जुड़े देशभर से अधिकारी, कर्मचारी, प्रोफेशनल्स, सीए, सीएस ले रहे हैं भाग
आबूरोड। ब्रह्माकुमारीज़ के फाइनेंस फ्रेटरनिटी सेवा विंग द्वारा मान सरोवर परिसर के दिव्य शक्ति अनुभूति हॉल में पांच दिवसीय चौथे माइंड-मनी-मैनेजमेंट राष्ट्रीय सेवा सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन में देशभर से फाइनेंस, एकाउंट, टैक्सेशन से जुड़े अधिकारी, कर्मचारी, प्रोफेशनल्स, सीए, सीएस भाग ले रहे हैं।
शुभारंभ पर अतिरिक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी बीके मुन्नी दीदी ने कहा कि धन का सही प्रबंधन तभी संभव है, जब मन शांत, स्थिर और सकारात्मक हो। परमात्म स्मृति मनुष्य को आंतरिक शक्ति और सही निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करती है। धन जीवन की आवश्यकता है, लेकिन धन से अधिक महत्वपूर्ण उसका सदुपयोग और उसके पीछे की भावना है।
द इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया के अध्यक्ष सीएमए चित्तरंजन चट्टोपाध्याय ने कहा कि वित्तीय क्षेत्र में जिम्मेदारी और विश्वास सबसे महत्वपूर्ण हैं। वित्त प्रबंधन केवल आंकड़ों और संसाधनों का प्रबंधन नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी भी है। ईमानदारी, पारदर्शिता और नैतिकता को वित्तीय निर्णयों का आधार बनाने की आवश्यकता है। आध्यात्मिक मूल्यों के साथ पेशेवर दक्षता जुड़ जाए तो व्यक्ति और संस्था दोनों अधिक मजबूत बनते हैं।
समय, विचार और ऊर्जा का भी सही प्रबंधन आवश्यक-
अंतरराष्ट्रीय मोटिवेशनल स्पीकर डॉ. जितेंद्र आधिया ने कहा कि मनुष्य की वास्तविक सफलता केवल धन और उपलब्धियों से नहीं मापी जा सकती। मन की प्रसन्नता, संतुलित सोच और सकारात्मक दृष्टिकोण जीवन की सबसे बड़ी पूंजी हैं। जिस प्रकार धन का बजट बनाया जाता है, उसी प्रकार समय, विचार और ऊर्जा का भी सही प्रबंधन आवश्यक है।
सेवा का आधार हो श्रेष्ठ भावना-
महासचिव राजयोगी बीके करुणा भाई ने कहा कि सेवा का आधार केवल कार्य नहीं, बल्कि श्रेष्ठ भावना और परमात्म शक्ति होनी चाहिए। जब मन में शुभ संकल्प होते हैं तो हमारे निर्णय, व्यवहार और कार्यों में भी सकारात्मकता दिखाई देती है। वित्त क्षेत्र से जुड़े लोगों की जिम्मेदारी समाज के प्रति और भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनके निर्णय अनेक लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं।
अतिरिक्त महासचिव राजयोगी बीके डॉ. मृत्युंजय भाई ने कहा कि बाहरी परिस्थितियों को नियंत्रित करने से पहले अपने मन को नियंत्रित करना आवश्यक है। मन शांत होगा तो व्यक्ति कठिन परिस्थितियों में भी सही निर्णय ले सकेगा। तनाव, चिंता और असंतुलन का समाधान बाहरी साधनों से अधिक आंतरिक शक्ति में निहित है।
धन को जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं बनाया जाना चाहिए-
ग्लोबल हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. प्रताप मिड्ढा ने कहा कि धन जीवन को सुगम बनाने का साधन है, लेकिन उसे जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं बनाया जाना चाहिए। धन का सदुपयोग समाज, परिवार और राष्ट्र के कल्याण में किया जाए तो वह सेवा का माध्यम बन जाता है।
बीके सीए ललित इनानी ने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए सम्मेलन के उद्देश्य पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में ‘कर्म से पुण्य कमा ले प्राणी’ गीत का विमोचन भी किया गया।
मधुर वाणी ग्रुप द्वारा स्वागत गीत तथा स्वागत नृत्य प्रस्तुत किया गया।
बीके सीए कृष्ण भाई ने आभार व्यक्त किया।
संचालन फाइनेंस फ्रेटरनिटी सेवा विंग की राष्ट्रीय समन्वयक बीके इशिता बहन ने किया।



