छत्तीसगढ़

भारतीय स्त्री शक्ति के मंच से गूंजा वन्देमारतरम का जयघोष

*भारतीय स्त्री शक्ति के मंच से गूंजा वन्देमारतरम का जयघोष*

*प्रदेशभर की प्रबुद्ध महिलाओं का हुआ सम्मान*

*भारतीय स्त्री शक्ति की नवनियुक्त कार्यकारिणी का अनूठा आयोजन*

30 जनवरी/रायपुर। देश में महिलाओं के क्षेत्र में कार्यरत प्रतिष्ठित संगठन भारतीय स्त्री शक्ति (बीएसएस) के छत्तीसगढ़ प्रान्त की नवनियुक्त कार्यकारिणी ने सावित्रीबाई फुले जन्म जयंती का आयोजन किया। इस अवसर पर राज्यस्तरीय सम्मान समारोह का भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में सेवाएं दे रहीं महिलाओं ने उपस्थिति दर्ज करवाई।

उपस्थित सभा को मुख्य अतिथि के रूप में श्री राजेन्द्र प्रसाद श्रीवास्तव जी सदस्य अखिल भारतीय कार्यकारिणी धर्म जागरण, मुख्य वक्ता के तौर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रान्त संघचालक श्री टोपलाल वर्मा जी, महापौर रायपुर श्रीमती मीनल चौबे, समन्वय की प्रान्त प्रमुख श्रीमती रश्मि द्विवेदी, भाजपा की प्रदेश प्रदेश प्रवक्ता डॉ शताब्दी पांडे, भारतीय स्त्री शक्ति की प्रान्त प्रमुख श्रीमती संगीता मिश्रा जी ने संबोधित किया। साथ ही मार्गदर्शक वरिष्ठ पत्रकार प्रियंका कौशल जी ने नवनिर्वाचित टीम को शुभकामनाए दी।

कार्यक्रम में रायपुर की महापौर मीनल चौबे और छत्तीसगढ़ महिला आयोग की सदस्य दीपिका सोरी को सावित्री बाई फुले सम्मान दिया गया।

*भारत का इतिहास गौरवशाली रहा है-टोपलाल वर्मा जी*

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रान्त संघचालक श्री टोपलाल वर्मा जी ने मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए कहा कि सावित्री बाई फुले को स्मरण करना व अपने बीच कार्य कर रही बहनों का सम्मान करने लिए आप सब बधाई के पात्र हैं। सावित्रीबाई फुले ने अंग्रेजों की दासता के समय महिलाओं को शिक्षित करने का कार्य किया। भारत का इतिहास तो गौरवशाली रहा है। भक्ति काल मे मीराबाई ने जाग्रत समाज को किया। जीजाबाई ने, झांसी की बाई, रानी दुर्गावती,लोकमाता अहिल्याबाई ने भारतीय नारी का प्रतिनिधित्व किया। विधर्मियों के शासनकाल में जब स्त्रियों की दयनीय दशा हुई, तब सावित्रीबाई फुले ने महिलाओं के लिए विद्यालय प्रारम्भ किये। इस कार्य में उनके पति ज्योतिबा फुले ने उनकी सहायता की। वे केवल बच्चियों को शिक्षित नहीं कर रही थीं, किंतु समाज में पिछड़े लोगों को भी शिक्षित करने का कार्य किया। समाज जनजागरण के लिए उन्होंने कई कार्य किये।

उन्होंने कहा कि आरएसएस का यह संघ शताब्दी वर्ष में हम समाज से आग्रह है कि देश में आ रहे बड़े परिवर्तन में सबकी भागीदारी करें। हम भारत को विकसित राष्ट्र बना सकते हैं। पंच परिवर्तन में लोगों की सहभागिता का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि समाज को समरस बनाने का प्रयास करें। पर्यावरण सरंक्षण, स्व आधारित जीवन शैली अपनाएं, अधिकार की नहीं कर्तव्य की भी बात करें। हमें समाज को कुरुतियों से मुक्त करने के लिए से सावित्रीबाई फुले से प्रेरणा लेनी चाहिए।

*हमारे समाज मे कभी भेदभाव नहीं था-श्री राजेन्द्र प्रसाद श्रीवास्तव जी*

मुख्य अतिथि श्री राजेन्द्र प्रसाद श्रीवास्तव जी, सदस्य अखिल भारतीय कार्यकारिणी धर्म जागरण केंद्र श्री राम मंदिर ने कहा भारत को हम भूमि नहीं माता मानते हैं। सृष्टि में माताओ का बहुत बड़ा स्थान है। जो हमें जन्म देती है, पालन पोषण करती है। हम धरती माता, गौ माता, प्रकृति माता की पूजते हैं। माता की बड़ी महिमा हमारे भारत मे है। हमारी माता की संस्कृति है। विश्व में केवल भारत को माता कहा गया है। इंग्लैंड में तो बाद मे महिलाओं को वोट देने का अधिकार मिला। भारत में तो यह अधिकार हमेशा से रहा है। हमारे यहां कोई अगड़ा पिछड़ा नहीं था। हमारे यहां यह शब्द नहीं था। शक्ति की धारिणी माँ है, इसलिए दुर्गा जी की पूजा करते हैं। धन की देवी लक्ष्मी मां और ज्ञान के लिए मां सरस्वती की पूजा करते हैं। हमारे समाज मे कभी भेदभाव नहीं था। बीच में जो कुरुतियाँ आयी हैं, वह हमारे लिए चुनौती है। हमारी बेटियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। देश, काल, परिस्थिति में महिलाओं की बहुत बड़ी भूमिका है। हम भविष्य में बेटियों से कोई भेदभाव नहीं होने देंगे।

*मेरे लिए तो शहर की मातृशक्ति ही प्रेरणा है-मीनल चौबे*

महापौर रायपुर श्रीमती मीनल चौबे ने कहा कि छत्तीसगढ़ की मातृशक्ति की विशेषता है कि छोटी सी बच्ची के दर्द को भी महसूस करती हैं। मैंने सावित्री बाई फुले जी को अहिल्याबाई होलकर को नहीं देखा है, मेरे लिए तो शहर की मातृशक्ति ही प्रेरणा है। मैं आपको विश्वास दिलाती हूँ कि हमारे रहते किसी बच्ची के साथ कुछ भी गलत हुआ तो हम शासन प्रशासन पर दवाब बनांकर कार्रवाई करेंगे। मैं महापौर बनीं क्योंकि सीट महिलाओं के लिए आरक्षित थी,यकीन इसके पहले मैं नेता प्रतिपक्ष थी, यह मेरे दल भाजपा की खूबसूरती है कि वह महिलाओं को मौका देती है। सम्मान तो बहुत मिलते हैं लेकिन यह जो सम्मान आज मिला है, उसके लिए आभार करती हूँ।

*मातृशक्ति कहीं कमजोर नहीं है-रश्मि द्विवेदी*

समन्वय की प्रान्त प्रमुख श्रीमती रश्मि द्विवेदी ने कहा कि भारतीय स्त्री शक्ति के नाम से परिलक्षित है कि भारत में महिलाओं को दोयम दर्जा नहीं नहीं था। देवताओं के पहले देवियों का नाम आता है। मध्यकाल में आक्रांताओं के कारण नैरेटिव बनाया गया कि भारत में स्त्रियां कमजोर हैं। भारतीय समाज मे स्त्रियों ने नहीं विरोधाभास नहीं सहा। भारतीय समाज को मध्यकाल में संक्रमित किया गया। उस वक़्त छुआछूत जैसे कुप्रथा या स्त्रियों को कमजोर करने का प्रयास किया गया। मातृशक्ति कहीं कमजोर नहीं है।

*बीएसएस केवल संगठन नहीं बल्कि बल्कि महिला जागरण का सशक्त आंदोलन-डॉ शताब्दी पांडे*

भारतीय स्त्री शक्ति की छत्तीसगढ़ प्रान्त की सरंक्षक श्रीमती शताब्दी पांडे ने संगठन की जानकारी देते हुए कहा कि बीएसएस ने महिलाओं के जीवन को वास्तविक रूप से बदलने का कार्य किया है। इसकी स्थापना 15 मई 1988 में हुई। यह फेश के 9 राज्यों में सक्रिय है, जहाँ इसकी 40 से अधिक शाखाएं और 25 से अधिक सम्पर्क केंद्र हैं। शिक्षा, आर्थिक सशक्तिकरण, सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, आत्मसम्मान के क्षेत्र में लगातार महिलाओं को न केवल जागरूक कर रहा है, बल्कि उनकी सहायता भी कर रहा है। यह संगठन शहर से गांव तक नारी चेतना का दीप जलाने का कार्य कर रहा है।

*छत्तीसगढ़ की बेटियों का सम्मान कर हम गौरान्वित हैं-श्रीमती संगीता मिश्रा*

स्वागत भाषण देते हुए छत्तीसगढ़ प्रान्त अध्यक्ष श्रीमती संगीता मिश्रा ने कहा कि वे छत्तीसगढ़ की समस्त बहनों को प्रणाम करती हैं। उनके साहस, सेवाभाव और निरन्तर सक्रिय रहने के जज्बे को हम सम्मानित कर स्वयं गौरान्वित महसूस कर रहे हैं।

इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार प्रियंका कौशल ने भी सभा को संबोधित किया। कार्यक्रम में प्रदेश भर से आईं विशिष्ट कार्य कर रहीं 28 महिलाओं और 12 विभिन्न समाजों की प्रमुख महिलाओं का सम्मान किया गया। 35 देशों में प्रस्तुति दी चुकीं सुश्री ममता आहार ने सावित्री बाई फुले पर एकल नाट्य प्रस्तुत किया।
साहित्यकार और वरिष्ठ चिकित्सक डॉ शीला गोयल जी ने काव्य पाठ किया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान प्राप्त कविता ‘अम्मा के गहने’ भी सुनाई। आभार प्रदर्शन लक्ष्मी यादव ने किया। कार्यक्रम का सफल संचालन बीएसएस की सचिव डॉ भारवि वैष्णव ने किया।

*इनका हुआ सम्मान*

1-सेवा समिति,
2-दिव्यांग बालिका गृह महाराष्ट्र मंडल
3-भारतीय योग संस्थान
4-ब्राह्मण समाज
5-राजपूत समाज
6-अघरिया समाज
7-सिंधी समाज
8-अग्रवाल महिला मंडल
9-कल्याण आश्रम
10-यादव समाज
11-पंजाबी समाज
12-जैन समाज

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