बस्तर में बचे आखरी मोस्ट वांटेड सीनियर नक्सली कमांडर पापा राव ने 17 नक्सलियों सहित किया सरेंडर…

छत्तीसगढ़/जगदलपुर : छत्तीसगढ़ के बस्तर में नक्सलवाद की तस्वीर अब बदलती हुई नजर आ रही है. इसी बदलाव के अभियान के बीच एक ऐतिहासिक मोड़ बनकर सामने आया है. मोस्ट वांटेड सीनियर नक्सली कमांडर पापा राव, जिसने वर्षों तक जंगलों को गोलियों की गूंज से अशांत कर रखा था, उसने आखिरकार अपने 17 साथियों के साथ हथियार डालने का फैसला किया. मुख्यधारा में लौटने से पहले पापा राव ने लोकतंत्र पर दोबारा भरोसा लौटने, बस्तर के भूगोल, माओवादी रणनीतियों और इलाके में तेजी से बढ़ते सुरक्षा कैंपों पर विस्तार से अपनी बात रखी।
सब से ज्यादा नुकसान आम आदिवासी को हुआ…
नक्सली कमांडर पापा राव ने बताया कि करीब 10 दिनों तक खुद से लड़ने के बाद उसने हथियार छोड़ने का निर्णय लिया. इस लड़ाई ने संगठन से ज्यादा नुकसान आम आदिवासी जनता को दिया है. उसे अब संविधान की ताकत पर भरोसा है. वह अब जल, जंगल और जमीन की लड़ाई बंदूक से नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक तरीके से लड़ने की बात कर रहा है।
सुरक्षा बलों की मजबूत पकड़ और लगातार बढ़ते कैंप…
नक्सली कमांडर पापा राव ने कहा कि यह आत्मसमर्पण डरकर नहीं, बल्कि समझदारी से लिया गया फैसला है. क्योंकि अब बस्तर का भूगोल बदल चुका है. चारों तरफ सुरक्षा बलों की मजबूत पकड़, लगातार बढ़ते कैंप और सिमटता हुआ जंगल है. इन हालातों में माओवादी रणनीति कमजोर पड़ चुकी है।
बंदूक की लड़ाई का कोई भविष्य नहीं सिर्फ…
नक्सली कमांडर पापा राव ने शीर्ष माओवादी नेता देवजी को लेकर भी अपनी प्रतिक्रिया दी. कहा कि देवजी के जाने के बाद भी वह डटा रहा, उसने सोचा था कि वह बस्तर की कमान संभालेगा. लेकिन हालात ने उसे आईना दिखा दिया कि अब बंदूक की लड़ाई का कोई भविष्य नहीं है. जो माओवादी मुख्यधारा में नहीं लौटे हैं, पापा राव ने उनसे जंगल छोड़ने समाज में लौटने की अपील की और कहा कि असली लड़ाई अब संविधान के भीतर ही जीती जा सकती है।



