छत्तीसगढ़ की 9वीं की छात्रा हिमांशी साहू का (ISRO) के प्रतिष्ठित ‘यंग साइंटिस्ट प्रोग्राम (युविका)में हुआ चयन…

छत्तीसगढ़/बालोद : स्वामी आत्मानंद विद्यालय कन्नेवाड़ा की कक्षा 9वीं की छात्रा हिमांशी साहू का चयन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के प्रतिष्ठित ‘यंग साइंटिस्ट प्रोग्राम (युविका)’ के लिए हुआ है. इस उपलब्धि के साथ हिमांशी ने न सिर्फ अपने स्कूल और परिवार का नाम रोशन किया है बल्कि पूरे जिले को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है।
साढ़े पांच लाख छात्रों में से हिमांशी ने…
छात्रा हिमांशी ने इस प्रोग्राम के लिए ओलंपियाड परीक्षा के माध्यम से आवेदन किया था. कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच उनका चयन होना उनकी मेहनत और प्रतिभा को दर्शाता है. खास बात यह है कि लगभग साढ़े पांच लाख छात्रों में से हिमांशी ने छत्तीसगढ़ में दूसरा स्थान हासिल किया है जबकि ऑल इंडिया रैंक में वह 112वें स्थान पर रही हैं।
ताइक्वॉंडो में स्टेट लेवल उपलब्धि…
हिमांशी पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद में भी सक्रिय हैं. ताइक्वॉंडो में स्टेट लेवल उपलब्धि और स्काउट गाइड और रेड क्रॉस के प्रमाण पत्र उनके व्यक्तित्व को और मजबूत बनाते हैं. यही बहुमुखी प्रतिभा उनके चयन में अहम भूमिका निभाने वाली रही. चयन के बाद हिमांशी ने बालोद कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा से मुलाकात की. कलेक्टर ने इस उपलब्धि को जिले के लिए गौरवपूर्ण बताते हुए उन्हें बधाई दी और उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
देश की सेवा करने की इच्छा…
कलेक्टर ने हिमांशी से उनके लक्ष्य के बारे में जब पूछा तो छात्रा हिमांशी ने कहा सिविल सेवा में जाकर देश की सेवा करने की इच्छा जाहिर की. हिमांशी ने अपनी सफलता का श्रेय अपने स्कूल के प्रिंसिपल, शिक्षकों और माता-पिता को दिया है. उन्होंने कहा कि ‘युविका’ प्रोग्राम की जानकारी उन्हें उनके प्रिंसिपल के माध्यम से मिली थी, जिनके मार्गदर्शन में ही उन्होंने आवेदन किया था.
माता पिता दोनों टीचर…
परिवार की बात करें, तो हिमांशी एक शिक्षित परिवार से आती हैं. उनके पिता अभय साहू बालोद जिले के शासकीय हाईस्कूल जमरवा में लेक्चरर हैं जबकि माता संगीता साहू शासकीय प्राथमिक शाला पाखुरभांट में सहायक शिक्षिका हैं।
पिता ने कहा कि हिमांशी शुरू से ही मेधावी रही हैं और पढ़ाई के प्रति इतनी समर्पित है कि कई बार उन्हें खुद कहना पड़ता है कि थोड़ा खेल भी लिया करो. संयुक्त परिवार में पली-बढ़ी हिमांशी की सफलता में उनके परिवार के हर सदस्य का योगदान रहा है. खासकर उनकी दादी, जिन्होंने बचपन में उनका होमवर्क कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
परिवार सहित पुरे क्षेत्र में खुशी का माहौल…
बेटी की इस उपलब्धि से परिवार में खुशी का माहौल है. रिश्तेदारों और परिचितों से लगातार बधाइयों का सिलसिला जारी है. हिमांशी की यह सफलता बालोद जिले के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है, जो यह साबित करती है कि छोटे शहरों से भी बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं.



