ब्रह्माकुमारीज समर कैम्प : जीवन में सद्गुणों और विशेषताओं को धारण कर सफल नागरिक बनें…ब्रह्माकुमारी सविता दीदी

– सफल होना है तो रिस (ईर्ष्या) नहीं रेस (प्रतिस्पर्धा) करें…
– जीवन में सद्गुणों और विशेषताओं को धारण कर सफल नागरिक बनें… ब्रह्माकुमारी सविता दीदी
– लक्ष्य के बिना उम्र में बड़े तो हो जाएंगे लेकिन सफल नहीं कहलाएंगे…
रायपुर, 9 मई 2026: प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा चौबे कालोनी रायपुर में आयोजित समर कैम्प में रायपुर संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने आज बच्चों को जीवन में नैतिकता विषय पर अपने आशीर्वचनों से लाभान्वित किया। उन्होंने बच्चों को स्वयं में विशेषताएं भरकर अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए बहुत ही उपयोगी सुझाव दिए।
ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने कहा कि किसी की सफलता को देखकर उससे ईर्ष्या नही करें। सफल होना है तो रिस (ईर्ष्या) नहीं रेस (प्रतिस्पर्धा) करो। हरेक बच्चे को अपने जीवन में कोई लक्ष्य अवश्य निर्धारित करना चाहिए। लक्ष्य निर्धारित करने से आगे बढऩे का मार्ग सुनिश्चित हो जाता है। इससे मन यहाँ-वहाँ भटकने की अपेक्षा शान्त चित्त होकर एक ही दिशा में अर्थात लक्ष्य को प्राप्त करने पर विचार करेगा। जीवन में लक्ष्य नहीं बनाया तो उम्र में बड़े तो हो जाएंगे किन्तु सफल व्यक्ति नहीं कहलाएंगे।
उन्होंने आगे कहा कि जैसे दुनिया में बाह्य शरीर को सजाने सॅंवारने के लिए ब्यूटी पार्लर होते है उसी प्रकार अपने आंतरिक स्वरूप को निखारने के लिए भी ऐसे पार्लर की आवश्यकता है जहॉं अंतर्मन को दिव्य गुणों और मानवीय मूल्यों से सजाया जा सके।
उन्होंने बतलाया कि अपने आचरण, व्यवहार और सोच को रचनात्मक बनाकर बुरी आदतों, व्यसनोंं आदि से स्वयं को मुक्त करना ही सच्चे अर्थों में व्यक्तित्व का विकास करना है। हमारे शारीरिक और बौद्घिक विकास के लिए राजयोग मेडिटेशन की साधना बहुत ही उपयोगी है। जीवन में सम्मान एवं आज्ञाकारिता का महत्व बतलाते हुुए उन्होंंने बच्चों से कहा कि हमेंं अपने बड़ोंं का आदर करना चाहिए तथा उनकी आज्ञा का पालन करना चाहिए इससे न केेवल बड़े-बुजुर्गों की बल्कि भगवान की भी दुआएं मिलेंगी। कभी किसी बात का अहंकार नहीं होना चाहिए बल्कि नम्र बनें और सभी से मधुर बोल ही बोलें।
उन्होने सभी बच्चों को व्यक्तिगत डायरी रखने का सुझाव देते हुए कहा कि एकान्त में बैठकर रोजाना उसमें अपने मन की बातें लिखने की आदत डालें। इससे मन हल्का रहेगा और आपकी कल्पनाशक्ति बढ़ेगी। अगर भाषा अच्छी होगी तो भविष्य में आप अच्छे लेखक या कवि भी बन सकते हैं। रात को सोने से पहले और सुबह उठने के बाद दस मिनट मेडिटेशन जरूर करना चाहिए। इससे परमात्मा की शक्तियाँ हमें मिलती हैं।



