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तीन सौ से अधिक भाई-बहनों को रक्षासूत्र बांधकर दिलाया नशामुक्त समाज निर्माण में सहयोग का संकल्प

– आंतरिक शक्ति, दृढ़ संकल्प और परमात्म स्मृति से होगी सच्ची रक्षा: राजयोगिनी बीके रुक्मणी दीदी

– ज्ञानदीप सेवाकेंद्र पर परमात्म रक्षासूत्र कार्यक्रम आयोजित

– तीन सौ से अधिक भाई-बहनों को रक्षासूत्र बांधकर दिलाया नशामुक्त समाज निर्माण में सहयोग का संकल्प

आबूरोड। ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के मानपुर स्थित ज्ञानदीप सेवाकेंद्र पर रक्षाबंधन के पावन पर्व के उपलक्ष्य में परमात्म रक्षासूत्र कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आध्यात्मिकता, भाईचारे और सामाजिक जागरूकता के संदेश से ओतप्रोत इस कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारी दीदियों ने तीन सौ से अधिक भाई-बहनों को परमात्म रक्षासूत्र बांधकर नशामुक्त समाज के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प कराया।

कार्यक्रम में राजयोगिनी बीके रुक्मणी दीदी ने रक्षाबंधन का आध्यात्मिक महत्व बताते हुए कहा कि सच्ची रक्षा बाहरी परिस्थितियों से नहीं, बल्कि मनुष्य की आंतरिक शक्तियों, दृढ़ संकल्प और परमात्म स्मृति से होती है। जब व्यक्ति अपने मन और बुद्धि को बुरी संगति, व्यसनों तथा नकारात्मक आदतों से सुरक्षित रखता है, तभी उसका जीवन वास्तव में सुखी और सार्थक बनता है। परमात्म रक्षासूत्र हमें यह प्रेरणा देता है कि हम अपने जीवन को व्यसनों, विकारों और नकारात्मक प्रवृत्तियों से मुक्त रखते हुए समाज को भी श्रेष्ठ दिशा प्रदान करें। आज नशा केवल व्यक्ति के जीवन को ही प्रभावित नहीं कर रहा है, बल्कि परिवार और समाज की सुख-शांति को भी नष्ट कर रहा है। नशे की बुरी आदतों से मुक्त होकर ही व्यक्ति अपने जीवन में वास्तविक खुशी और आत्मिक शक्ति का अनुभव कर सकता है।

उन्होंने कहा कि परमात्मा की स्मृति और राजयोग के अभ्यास से मनुष्य के भीतर ऐसी आत्मिक शक्ति का विकास होता है, जिससे वह किसी भी बुरी आदत और कमजोरी पर विजय प्राप्त कर सकता है। उन्होंने सभी से स्वयं नशामुक्त रहने के साथ-साथ दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करने का आह्वान किया।

प्रत्येक नागरिक को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी-

सेवाकेंद्र प्रभारी राजयोगिनी बीके भारती दीदी ने कहा कि रक्षासूत्र का वास्तविक अर्थ है अपने जीवन की रक्षा करना और दूसरों के जीवन को भी बुराइयों से बचाने का प्रयास करना। आज समाज को नशामुक्त बनाने के लिए केवल प्रशासन या किसी एक संस्था के प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि प्रत्येक नागरिक को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। यदि हम अपने घर, परिवार और आसपास के लोगों को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करें तो एक स्वस्थ, खुशहाल और संस्कारवान समाज का निर्माण किया जा सकता है।

युवा सकारात्मक कार्यों से जुड़े-

बीके रत्न यादव ने कहा कि नशा व्यक्ति की सोचने-समझने की शक्ति को कमजोर करता है और उसके जीवन की दिशा बदल देता है। इसलिए युवाओं को विशेष रूप से नशे से दूर रहकर अपने जीवन को सकारात्मक कार्यों और श्रेष्ठ संस्कारों से जोड़ना चाहिए। बीके सीमा दीदी ने सभी अतिथियों एवं उपस्थित भाई-बहनों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भाई-बहनों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर परमात्म रक्षासूत्र का आध्यात्मिक संदेश ग्रहण किया।

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