धार सड़क हादसा : एक साथ हुआ 16 लोगों का अंतिम संस्कार…केंद्रीय मंत्री सविता ठाकुर ने पहुच कर परिजनों को ढांढस बंधाया

मध्यप्रदेश के धार जिले में हुए भीषण सड़क हादसे ने पूरे इलाके के लोगों को झकझोर कर रख दिया है। इंदौर-अहमदाबाद हाईवे पर तिरला ब्लॉक के पास हुए इस दर्दनाक हादसे में 16 लोगों की जान चली गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। एक ही परिवार के कई सदस्यों की एक साथ मौत और गांवों में एक साथ उठती चिताओं का मंजर हर किसी की आंखें नम कर रहा है। यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि कई परिवारों की दुनिया उजड़ने की कहानी बन गया है। हादसे की अहम वजह ओवरस्पीडिंग बताई जा रही है।
पोस्टमार्टम के बाद इतने शवों को अलग-अलग गांव भेजने के लिए वाहन कम पड़ गए थे। उज्जैन, झाबुआ और रतलाम से अतिरिक्त वाहन बुलवाने पड़े। गांव-गांव जब शव पहुंचे तो परिजन चीख-चीख कर रोए। 9 मृतक ग्राम नयापुरा के थे। वहीं पांच मृतक सेमलीपुरा के और दो रामपुरा के थे। अलग-अलग मुक्तिधाम पर सभी मृतकों का अंतिम संस्कार हुआ।
मंत्री सविता ठाकुर पहुंची…
केंद्रीय मंत्री सविता ठाकुर अंतिम संस्कार में पहुंची थी। उन्होंने मृतकों के परिजनों से भेंट कर उन्हें ढांढस बंधाया। इस असहनीय पीड़ा की घड़ी में हर संभव साथ देने का विश्वास दिलाया। मंत्री सविता ठाकुर ने सर्किट हाउस पर पुलिस अधीक्षक, डीआईजी और कलेक्टर के साथ बैठक की। उन्होंने दुर्घटना के कारणों का गंभीरता से विश्लेषण करते हुए भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने हेतु आवश्यक एवं प्रभावी उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
टर्न पर न तो कोई साइन बोर्ड है और न ही स्टॉप सिग्नल…
इधर इंदौर ग्रामीण डीआईज मनोज कुमार ने भी घटनास्थल का मुआयना किया। उनके अनुसार, हादसे की प्रमुख वजह ओवरस्पीडिंग थी। इसके अलावा उन्होंने रोड इंजीनियरिंग और एनएचआई की गलती भी पॉइंट आउट की। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि, यहां टर्न पर न तो कोई साइन बोर्ड है और न ही स्टॉप सिग्नल। डीआईज मनोज कुमार ने बताया है कि, वे इस संबंध में NHAI को पत्र लिखेंगे।
कैसे हुआ धार में भीषण सड़क हादसा…
बुधवार शाम 8:30 बजे के करीब तिरला थाना क्षेत्र के चिकलिया फाटे पर हादसा हुआ था। तेज रफ्तार पिकअप का तैयार फट गया था। इसके कारण ट्रॉली सामने आ रही स्कॉर्पियो से टकरा गई।
पिकअप वाहन में 44 मजदूर सवार थे। ये लोग फसल काटकर वापस लौट रहे थे। कई घायलों का इलाज इंदौर और धार में अलग-अलग जगह हो रहा है। कुछ घायलों को तो अपने परिजनों की मौत की जानकारी भी नहीं है।



