मध्यप्रदेश

राजा रघुवंशी का परिवार सोनम रघुवंशी की जमानत के खिलाफ जाऐगा सुप्रीम कोर्ट… मेघालय हाई कोर्ट के फैसले से असंतुष्ट…

मध्यप्रदेश/इंदौर : चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को मेघालय हाई कोर्ट से मिली जमानत के बाद मामले ने नया कानूनी मोड़ ले लिया है। हाई कोर्ट के फैसले से असंतुष्ट राजा रघुवंशी का परिवार अब जमानत रद्द कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रहा है। परिवार का कहना है कि वे न्याय की लड़ाई आगे भी पूरी मजबूती से लड़ेंगे।

जमानत रद्द करने की मांग…
राजा रघुवंशी के बड़े भाई विपिन रघुवंशी ने बताया कि जल्द ही सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर सोनम की जमानत रद्द करने की मांग की जाएगी। उनका आरोप है कि मेघालय पुलिस की एक गंभीर कानूनी लापरवाही के कारण आरोपी को जमानत का लाभ मिला। उन्होंने कहा कि अब परिवार केवल सरकारी अभियोजन पक्ष पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि मामले की पैरवी के लिए निजी वकील भी नियुक्त करेगा।

दरअसल, मेघालय हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि गिरफ्तारी के समय पुलिस ने सोनम रघुवंशी को हिरासत में लेने के कानूनी आधार स्पष्ट रूप से नहीं बताए। अदालत ने इसे संविधान के अनुच्छेद 22(1) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 47(1) का उल्लंघन माना। कोर्ट के अनुसार, किसी भी आरोपी को गिरफ्तारी का कारण बताना उसका संवैधानिक अधिकार है और इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया जाना गंभीर कानूनी त्रुटि है।

परिवार का मानना है कि इस प्रक्रिया संबंधी चूक का फायदा आरोपी को मिला और इसी आधार पर हाई कोर्ट ने जमानत बरकरार रखी। अब परिवार सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले को चुनौती देकर मामले की दोबारा सुनवाई की मांग करेगा।

नजर सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई पर…
गौरतलब है कि इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी की शादी पिछले वर्ष 11 मई को सोनम रघुवंशी से हुई थी। शादी के कुछ दिनों बाद, 20 मई को दोनों हनीमून मनाने मेघालय गए थे। 23 मई को सोनम के लापता होने की सूचना सामने आई, जबकि 2 जून को सोहरा (चेरापूंजी) क्षेत्र की एक गहरी खाई से राजा रघुवंशी का शव बरामद हुआ था।

जांच के दौरान पुलिस ने दावा किया कि सोनम रघुवंशी ने अपने कथित प्रेमी राज कुशवाहा और उसके साथियों के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची थी। इसके बाद सोनम को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से गिरफ्तार किया गया था। अब हाई कोर्ट से मिली जमानत के बाद यह मामला एक बार फिर कानूनी बहस के केंद्र में आ गया है और सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी है।

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