छत्तीसगढ़

तनाव मुक्त खुशनुमा जीवन…जो बीत गया उसका जिक्र नहीं और जो कल होगा उसकी फिक्र नहीं…

– जो बीत गया उसका जिक्र नहीं और जो कल होगा उसकी फिक्र नहीं…

– आबू राज पर्वत,पानीपत,दिल्ली से आए ब्रह्माकुमारो ने तनाव मुक्त खुशनुमा जीवन जीने की बताई विधि…

छत्तीसगढ़/भिलाई : प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा सेक्टर 7 स्थित पीस ऑडिटोरियम में साइंटिस्ट एंड इंजीनियर विंग के अध्यक्ष ब्रह्माकुमार मोहन सिंघल भाई, आबू राज पर्वत से छत्तीसगढ़ प्रवास पर आए आपने जीवन को तनावमुक्त ख़ुशनुमा बनाने अपने अनुभवयुक्त विचार व्यक्त करते हुए बताया कि इधर-उधर देखते हो तो सर्व की कमी कमजोरी,अवगुण दिखाई देंगे इसलिए सामने एक परमात्मा देखे।

आपने पांच शब्दों क्यों, क्या, कैसे, कंहा,कब जैसे शब्दों से दूर रहने का आग्रह किया।

परमात्मा को प्रतिदिन याद करने के सन्दर्भ में आपने कहा कि मनुष्य का स्वभाव है उसे नवीनता रचनात्मकता चाहिए सोमवार को परमात्मा शिव को पिता के रूप में याद करें। मंगलवार को मां बनाकर शीतल पालना में रहे, बुधवार को शिक्षक के रूप में शिक्षा ले, गुरुवार को सद्गुरु के रूप में वरदान प्राप्त करे। शुक्रवार को सखा दोस्त के रूप में हर बात परेशानी तनाव चिंता सुनाकर अर्पण करे। शनिवार को परमात्मा को छोटा बच्चा बालक के रूप में याद करें। रविवार को जीवनसाथी, हमसफर बनाकर हर कदम में साथ देने वाले के रूप में प्रेम से याद करे।

पानीपत से आए ब्रह्माकुमार भारत भूषण भाई ने कहा कि परमात्मा को घर का मालिक बनाएं, घर के दिवार अच्छी है लेकिन मंदिर की दीवारों में शक्तिशाली प्रकंपन होते हैं, आप सभी घर में परमात्मा को याद कर घर में शक्तिशाली वातावरण का निर्माण कर सकते हैं।आपने क्रोधमुक्ति के लिए एक महीने का होमवर्क देते बताया की एंगर क्रोध को डेंजर न बनने दे टेंशन के आगे अ लगाकर हर बात में अटेंशन दे, शुभ विचारों,संकल्प से घर को स्वयं को परिवार को एंगर फ्री टेंशन फ्री जोन बनाकर स्माइलिंग जोन बनाएं।

नई दिल्ली से आए ब्रह्माकुमार पीयूष ने कहा कि दिन में छोटा बच्चा 400 बार मुस्कुराता है क्योंकि बच्चे वर्तमान में जीते हैं और हम सभी बड़े पास्ट और फ्यूचर की बातों को पकड़कर जीते हैं। आपने योगी जीवन की कठिनाई बताते हुए कहा कि मैं दुनिया में नहीं रहता लेकिन दुनिया की सारी बातें मेरे अंदर रहती है आपको योगी जीवन बनाना है व्यर्थ बातों से अंधा गूंगा बहरा बनना है।

जो बीत गया उसका जिक्र नहीं और जो कल होगा उसकी फिक्र नहीं।

आपने सुंदर स्लोगन बताया कि ट्विंकल ट्विंकल लिटिल स्टार आत्मा ड्राइवर बॉडी ईज ए कार ।
देह की कर्मेन्द्रियों का उपयोग मालिक बनकर करना है,यह ही राजयोग मेडिटेशन की सरल विधि है।

भिलाई सेवाकेंद्रों की निदेशिका राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी आशा दीदी जी ने सभी का आत्मिक तिलक और पुष्पगुच्छ द्वारा स्वागत किया।

आबू राज पर्वत से आए ब्रह्माकुमार मोहन भाई ने भिलाई ब्रह्माकुमारी भिलाई स्टील प्लांट के प्रति कहा कि जिसका स्टील आईएनएस विक्रांत और चंद्रयान में लगा, पीस ऑडिटोरियम में श्वतवस्त्र धारी फ़रिश्तों की सभा को देखकर आपने आशा दीदी की महिमा करते हुए कहा कि उनकी आंतरिक शक्तिशाली स्थिति के कारण भिलाई की फुलवारी को देखकर अत्यंत प्रसन्नता खुशी हो रही है जिसकी रचना इतनी सुंदर वह कितना सुंदर होगा।

डिवाइन ग्रुप के बच्चों ने सुंदर स्वागत नृत्य प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम का सुंदर मंच संचालन वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी प्राची दीदी ने किया।

ब्रह्माकुमारी आशा दीदी जी ने तीनों उपस्थित भाइयों की विशेषता बताते हुए कहा कि आप वरिष्ठ भाई राजयोगिनी दादियों के सदा आज्ञाकारी होकर रहे। राजयोगिनी दादियों की आत्मिक पालना, धारणाएं ,एकता यूनिटी के कारण आज ब्रह्माकुमारीज़ संस्था का नाम विश्व में प्रसिद्ध है।

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