धर्म-आध्यात्म

अमेरिका की पूर्व सैन्य चिकित्सा अधिकारी ब्रह्माकुमारी डॉ हंसा रावल का प्रथम बार छत्तीसगढ़ आगमन…दुर्ग आनंद सरोवर एवं भिलाई के पीस ऑडिटोरियम में 1 अगस्त 2026 को विशेष सत्र

अमेरिका की पूर्व सैन्य चिकित्सा अधिकारी ब्रह्माकुमारी डॉ हंसा का विशेष सत्र दुर्ग आनंद सरोवर एवं भिलाई के पीस ऑडिटोरियम में कल..

31जुलाई26भिलाई:- प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के अमेरिका स्थित टेक्सास सेवा केंद्रों की निदेशिका ब्रह्माकुमारी डॉ हंसा रावल एक दिवसीय प्रवास पर दुर्ग भिलाई पहुंच रही हैं।

अपने प्रवास के दौरान वे एक अगस्त शनिवार को दुर्ग बघेरा स्थित आनंद सरोवर में प्रातः 7:30 से 9 बजे तथा भिलाई सेक्टर 7 स्थित पीस ऑडिटोरियम में संध्या 6:30 से रात्रि 8 बजे तक मेडिटेशन, आध्यात्मिक ज्ञान, टाईम एंड स्लिप मैनजमेंट, आलस्य के दुष्प्रभाव, और अपने जीवन के प्रेरणादायक अनुभवों से सभी को लाभान्वित करेंगी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार डॉ हंसा रावल(अमेरिका – टेक्सास )पिछले 50 वर्षों से ब्रह्माकुमारी संस्थान से समर्पित रूप से जुड़ी हुई हैं।

ब्रह्माकुमारी डॉ हंसा रावल ने आध्यात्मिक सेवा के साथ-साथ अमेरिका में सेना में भी महत्वपूर्ण पद पर जिम्मेदारियां निभाई हैं।

अमेरिकी सेना में एक अत्यंत सम्मानित चिकित्सा अधिकारी एम डी भी रहीं। उन्होंने 26 वर्षों की सक्रिय सैन्य सेवा के उपरांत कर्नल के पद से सेवानिवृत्ति प्राप्त की। वे अमेरिका के सबसे बड़े सैन्य चिकित्सा केंद्रों में से एक में ऑन्कोलॉजी (कैंसर चिकित्सा) एवं पैथोलॉजी विभागों की निदेशक, रेज़िडेंसी एवं फेलोशिप प्रशिक्षण कार्यक्रमों की निदेशक तथा चिकित्सा (मेडिसिन) की प्रोफेसर रहीं।

डॉ. हंसा दीदी ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय, बोस्टन से रेज़िडेंसी एवं फेलोशिप प्रशिक्षण प्राप्त किया। उन्होंने कैंसर के निदान एवं उपचार में विशेषज्ञता हासिल की है। इसके अतिरिक्त, उनके पास विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) से आहार एवं पोषण में मास्टर डिग्री भी है।

उन्हें असाध्य (टर्मिनल) रोगों से पीड़ित रोगियों तथा उनके परिवारों को जीवन की अंतिम यात्रा के लिए मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक रूप से तैयार करने का व्यापक अनुभव है, जिससे वे अपने प्रियजनों को शांति एवं गरिमा के साथ विदा कर सकें।

अपने पूरे चिकित्सा जीवन में बीके डॉ. हंसा दीदी ने ब्रह्माकुमारीज़ राजयोग मेडिटेशन तथा शाकाहारी आहार को उपचार की एक पूरक (Complementary) पद्धति के रूप में अपनाया और उसका सफलतापूर्वक उपयोग किया।

इसके अलावा वे अमेरिका के बड़े मेडिकल सेंटर में अंकोलॉजी और पैथोलॉजी विभाग की डायरेक्टर तथा मेडिसिन की प्रोफेसर भी रह चुकी हैं।

वे अमेरिका में ब्रह्माकुमारी संस्थान की पहली विद्यार्थियों और शिक्षिकाओं में शामिल रही हैं।

वर्ष 1976 में अमेरिका में सेवाकेंद्रों की स्थापना में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी।

उनका प्रथम बार छत्तीसगढ़ आगमन है।

प्रेषक
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय
राजयोग भवन, सेक्टर 7, भिलाई
छत्तीसगढ़, भारत

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