छत्तीसगढ़

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ के प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी।

छत्तीसगढ़/रायपुर : छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। राज्य गठन के 26 वर्ष पूरे होने पर प्रधानमंत्री ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, प्राकृतिक संपदा, ऐतिहासिक धरोहरों और अनूठी लोक परंपराओं की सराहना की। उन्होंने प्रदेश की सांस्कृतिक विशेषताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां का लोक-संस्कृति से परिपूर्ण वातावरण हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करता है। प्रधानमंत्री ने नक्सलवाद के खिलाफ प्रयासों और राज्य की विकास यात्रा का भी जिक्र किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश की शुरुआत करते हुए कहा, ‘छत्तीसगढ़ के सभी निवासियों को राज्य के स्थापना दिवस की अनेकानेक शुभकामनाएं!’ उन्होंने इस अवसर पर प्रदेश की विशिष्ट पहचान और सांस्कृतिक विरासत को याद किया। प्रधानमंत्री का संदेश छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक सौंदर्य, जनजातीय परंपराओं और विकास से जुड़े विषयों पर केंद्रित रहा।

प्रधानमंत्री ने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विशेषताओं का उल्लेख करते हुए कहा, ‘यह प्रदेश अपनी जनजातीय संस्कृति, प्राकृतिक संपदा और अनूठी लोक परंपराओं के लिए प्रख्यात है। राज्य की पुरातात्विक धरोहरें इसकी विशेष पहचान रही हैं।’ उन्होंने प्रदेश की लोक-संस्कृति में मौजूद अपनेपन की भावना की भी प्रशंसा की और इसे लोगों को आकर्षित करने वाली विशेषता बताया। छत्तीसगढ़ देश के उन राज्यों में शामिल है, जहां जनजातीय संस्कृति और पारंपरिक जीवनशैली का महत्वपूर्ण स्थान है। बस्तर, सरगुजा सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग जनजातीय समुदायों की अपनी सांस्कृतिक पहचान है। यहां के पारंपरिक नृत्य, लोकगीत, हस्तशिल्प, त्योहार और रीति-रिवाज राज्य की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाते हैं।

प्रदेश की प्राकृतिक संपदा भी उसकी प्रमुख विशेषताओं में शामिल है। घने वन, नदियां, जलप्रपात, पहाड़ और खनिज संसाधन छत्तीसगढ़ को अलग पहचान देते हैं। चित्रकोट जलप्रपात, तीरथगढ़ जलप्रपात और विभिन्न ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक स्थल प्रदेश के प्राकृतिक और सांस्कृतिक महत्व को सामने लाते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने स्थापना दिवस संदेश में छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे प्रयासों का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद की जड़ें खत्म करते हुए राज्य विकास के रास्ते पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने इसे प्रदेश की प्रगति से जोड़ते हुए भविष्य के प्रति विश्वास व्यक्त किया।

नक्सलवाद लंबे समय से छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों, विशेषकर बस्तर संभाग, के लिए गंभीर सुरक्षा और विकास संबंधी चुनौती रहा है। सुरक्षा अभियानों के साथ सड़क, संचार, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विस्तार भी क्षेत्र में महत्वपूर्ण विषय रहा है। प्रधानमंत्री के संदेश में नक्सलवाद के खिलाफ प्रयासों को राज्य की विकास यात्रा से जोड़कर प्रस्तुत किया गया है। हालांकि नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त होने की स्वतंत्र पुष्टि इस संदेश से नहीं होती। प्रधानमंत्री ने प्रदेशवासियों की मेहनत, प्रतिभा और विकास में भागीदारी पर भी भरोसा जताया। उन्होंने कहा, ‘मुझे विश्वास है कि मेरे प्रतिभाशाली और परिश्रमी परिवारजनों की भागीदारी से यह प्रदेश राष्ट्र की समृद्धि में बढ़-चढ़कर योगदान देता रहेगा।’ प्रधानमंत्री के इस संदेश में प्रदेश के नागरिकों की भूमिका को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था में कृषि, उद्योग, खनन, वन आधारित गतिविधियों और सेवा क्षेत्र का योगदान है। राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आजीविका का प्रमुख साधन है, जबकि खनिज संसाधन और औद्योगिक गतिविधियां भी आर्थिक विकास से जुड़ी हुई हैं।

छत्तीसगढ़ का गठन 1 नवंबर 2000 को मध्य प्रदेश से अलग होकर हुआ था। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के कार्यकाल में राज्य का निर्माण हुआ। इसके बाद रायपुर को राजधानी बनाया गया और छत्तीसगढ़ ने एक अलग राज्य के रूप में अपनी प्रशासनिक तथा विकास यात्रा शुरू की। राज्य स्थापना दिवस के 26 वर्ष पूरे होने का यह अवसर छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक यात्रा को याद करने के साथ भविष्य की प्राथमिकताओं पर विचार करने का भी है। राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, ग्रामीण विकास, औद्योगिक निवेश और बुनियादी ढांचे के विस्तार जैसे विषय महत्वपूर्ण बने हुए हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश के अंत में प्रदेशवासियों के कल्याण की कामना की। उन्होंने कहा, ‘यह विशेष अवसर छत्तीसगढ़ के सभी निवासियों के लिए कल्याणकारी हो, यही कामना है!’ प्रधानमंत्री का स्थापना दिवस संदेश प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान, प्राकृतिक संपदा, जनजातीय परंपराओं और विकास की संभावनाओं पर केंद्रित रहा। उन्होंने छत्तीसगढ़ की विशेषताओं की सराहना करते हुए विश्वास जताया कि प्रदेश के मेहनती और प्रतिभाशाली नागरिक आने वाले समय में देश की समृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान देते रहेंगे।

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