नवा रायपुर शान्ति शिखर की पहली वर्षगांठ हर्षोल्लास के साथ धूमधाम से मनाई गई…

– एकेडमी फॉर ए पीसफुल वर्ल्ड- शान्ति शिखर की पहली वर्षगांठ…
– वार्षिक उत्सव के रूप में हर्षोल्लास के साथ धूमधाम से मनाया गया…
– शान्ति शिखर केवल एक भवन नहीं बल्कि विश्व में शान्ति और सद्भावना की ज्योति प्रज्वलित करने वाला आध्यात्मिक प्रकाश स्तम्भ है… ब्रह्माकुमारी सविता दीदी

नवा रायपुर। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के नवा रायपुर में सेक्टर-20 स्थित एकेडमी फॉर ए पीसफुल वर्ल्ड-शान्ति शिखर का प्रथम वर्षगांठ हर्षोल्लास के साथ धूमधाम से मनाया गया।
इस अवसर पर रायपुर संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी के साथ आईटीबीपी खरोरा के डिप्टी कमाण्डेन्ट संजीव सिंह, ब्रह्माकुमारी रश्मि दीदी, किरण दीदी, महासमुन्द सेवाकेन्द्र की संचालिका प्रीती दीदी, दुर्ग की संचालिका रीटा दीदी, भाटापारा की संचालिका मंजू दीदी, माउण्ट आबू से आए ब्रह्माकुमार अमरदीप भाई, उमाकान्त भाई, अर्जुन भाई, हरमोहन भाई, मोहन भाई आदि ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया।
समारोह को सम्बोधित करते हुए अपने प्रेरणादायी संदेश में ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने कहा कि शान्ति शिखर केवल एक भवन नहीं बल्कि विश्व में शान्ति, प्रेम और सद्भावना की ज्योति प्रज्वलित करने वाला आध्यात्मिक प्रकाश स्तम्भ है। उन्होंने कहा कि नवा रायपुर स्थित शान्ति शिखर की प्रथम वर्षगांठ हम सभी के लिए हर्ष, गौरव और आत्मचिंतन का सुखद अवसर है। यह एक वर्ष केवल समय की यात्रा नहीं बल्कि आध्यात्मिक जागृति, सकारात्मक चिंतन और मानवीय मूल्यों के संवर्धन की एक प्रेरणादायी यात्रा रही है।
ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने आगे कहा कि शान्ति शिखर की स्थापना का मूल उद्देश्य मनुष्य को बाहरी उपलब्धियों के साथ-साथ आंतरिक समृद्धि की ओर प्रेरित करना है। आज के भागदौड़, तनाव और प्रतिस्पर्धा से भरे जीवन में प्रत्येक व्यक्ति को शान्ति, संतुष्टि और आत्मिक शक्ति की आवश्यकता है। राजयोग मेडिटेशन वह सहज माध्यम है जिसके द्वारा हम स्वयं से जुड़कर अपने भीतर छिपी शान्ति, प्रेम, पवित्रता और सकारात्मकता की शक्तियों को जागृत कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि शान्ति केवल परिस्थितियों के अनुकूल होने का नाम नहीं है बल्कि यह मन की वह अवस्था है जो प्रतिकूल परिस्थितियों में भी हमें संतुलित और प्रसन्न रहना सिखाती है। जब व्यक्ति स्वयं में शान्ति का अनुभव करता है, तभी परिवार, समाज और विश्व में शान्ति का वातावरण निर्मित कर सकता है। स्वयं बदलें, संसार बदलेगा; स्वयं शान्त बनें, विश्व में शान्ति का प्रकाश फैलेगा।
उन्होंने सभी सहयोगियों, शुभचिंतकों एवं सेवाधारियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शान्ति शिखर की वास्तविक सफलता इसकी भव्यता में नहीं बल्कि यहां से प्राप्त आध्यात्मिक प्रेरणा द्वारा लोगों के जीवन में आने वाले सकारात्मक परिवर्तन में निहित है। इस प्रथम वर्षगांठ पर हम सभी यह संकल्प लें कि शान्ति शिखर से प्रज्वलित आध्यात्मिक ज्ञान और राजयोग की ज्योति को जन-जन तक पहुंचाकर एक सुखद, शान्त और स्वर्णिम समाज के निर्माण में सहभागी बनेंगे।



