Ganesh Chaturthi 2026 : रायपुर के रामसागर पारा में विराजें 11 फीट के रामस्वरूप में हर्बल धूपबत्ती से निर्मित गणेश जी…

छत्तीसगढ़/रायपुर : प्रदेश में गणेशोत्सव पर आस्था के रंग चारों तरफ बिखरे हुए हैं. करीब 100 बड़े पंडालों में गणपति की स्थापना हुई है. जिनमें से कई जगह अलग-अलग रूप और स्वरूप में अनोखी प्रतिमाएं भी दिख रही हैं. इनमें से कुछ गणपति पर्यावरण का संदेश दे रहे हैं. ऐसी ही एक प्रतिमा है रामसागर पारा में जो पूरी तरह से हर्बल धूपबत्ती से निर्मित है. इस गणपति में खास बात यह है कि इसे भगवान राम के स्वरूप में बनाया गया है.
श्रद्धालुओं ने की सराहना…
श्रद्धालुओं ने कहा- कि यह गणपति काफी खास है. क्योंकि यह पर्यावरण से रिलेटेड है. इसका निर्माण धूप बत्ती से किया गया है. यहां पर हर साल पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग तरह के गणपति की स्थापना की जाती है. कभी रुद्राक्ष से कभी पेंसिल से इस गणेश पंडाल में गणपति विराजित होते हैं.
जिस तरह से भगवान राम मर्यादा का पालन करते हैं इस तरह से यहां भी मर्यादा का पालन हो रहा है. अगर हर जगह पर इसी तरह के गणपति विराजित होते रहेंगे जो पर्यावरण की दृष्टि से उचित है. इससे पर्यावरण को भी कोई नुकसान नहीं होगा. इस पंडाल में मूर्ति और पर्यावरण को ध्यान में रखकर भगवान विराजित किए जाते हैं।
रायपुर के रामसागर पारा के श्री बाल गजानंद गणेश उत्सव समिति के अध्यक्ष कन्हाई खंडेलवाल ने बताया कि इस गणपति में खास बात यह है कि यह पूरी तरह से धूप बत्ती से बनाई गई है. इसमें मिट्टी और कलर का इस्तेमाल बिल्कुल भी नहीं किया गया है. पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए हर्बल धूपबत्ती का इस्तेमाल किया गया है.
11 फीट की रामस्वरूप में बनी इस गणपति प्रतिमा में लगभग 31000 पीस हर्बल धूपबत्ती का इस्तेमाल किया गया है. धूपबत्ती से निर्मित गणपति का वजन लगभग 150 किलोग्राम के आसपास होगा.
मूर्तिकार के द्वारा मटेरियल की डिमांड की जाती है तो हम मटेरियल उपलब्ध कराते हैं और मूर्तिकार को अलग से जो उनका मेहनताना होता है वह दिया जाता है.- कन्हाई खंडेलवाल, समिति अध्यक्ष
समिति ने पहले भी की कई सराहनीय पहल…
इसके पहले समिति के द्वारा चंदन की लकड़ी से निर्मित गणपति भी विराजित किया गया था. इसके साथ ही अनाज, पेंसिल, ड्राई फ्रूट्स, शंख सीप के साथ ही कोविड के दौर में जिन चीजों से काढ़ा बनाया जाता था उस समान से भी गणपति की स्थापना की गई थी. इस समिति के लोग स्कूल फ्रेंड है और उन्हीं के माध्यम से हर साल अलग तरह का निर्णय लिया जाता है कि इस बार गणपति की थीम कैसी होगी.



