Bada Mangal 2026 : आज साल का दूसरा बड़ा मंगलवार..करें हनुमान जी की विशेष रूप से पूजा, कृपा पाने के लिए अत्यंत फलदायी

भारत/धर्म-आध्यात्म : बड़े मंगल का दिन बजरंगबली की आराधना के लिए बेहद शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से हनुमान जी की पूजा करने और कुछ विशेष उपाय अपनाने से जीवन के दुख, बाधाएं और संकट जल्द दूर होने लगते हैं. साथ ही घर में सुख-समृद्धि, सकारात्मक ऊर्जा और सफलता का आगमन होता है.
दूसरे बड़े मंगल के दिन अपनी मनोकामनाएं पूर्ण करने के लिए बजरंगबली को सिंदूर और चमेली के तेल का चोला अर्पित करना बेहद शुभ माना जाता है.धार्मिक मान्यता है कि इससे हनुमान जी शीघ्र प्रसन्न होते हैं.जीवन में आ रही बाधाएं दूर होने लगती हैं,रुके हुए कार्यों में सफलता मिलती है और सुख-समृद्धि का मार्ग खुलता है।
ज्येष्ठ मास में पड़ने वाले मंगलवार को ‘बड़ा’ मंगल या ‘बुढ़वा’ मंगल कहा जाता है। इसके इस नाम के पीछे दो पौराणिक कथाओं का जिक्र मिलता है। एक कथा के अनुसार ज्येष्ठ मास के मंगलवार को ही भगवान राम वन में सीता को खोजते हुए पहली बार हनुमान से मिले थे। इस कारण इस महीने के सभी मंगलवार को ‘बड़ा’ मंगल के नाम से जाना जाता है।
वहीं दूसरी कथा के अनुसार, महाभारत काल में ज्येष्ठ मास के मंगलवार को हनुमान जी ने बूढ़े वानर का रूप धारण कर भीम के बल के अभिमान को नष्ट किया था। कालांतर में इसे ‘बुढ़वा’ मंगल भी कहा जाने लगा। इस दिन हनुमान जी के वृद्ध स्वरूप की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन पवन पुत्र को चोला चढ़ाने से हर प्रकार की बाधा दूर होती है। यह पर्व विशेष रूप से उत्तर भारत और खासकर उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल और मध्य क्षेत्रों में धूमधाम से मनाया जाता है।
जरूर करे दूसरे बड़े मंगल पर यह उपाय…
जिन लोगों की कुंडली में मंगल ग्रह कमजोर होता है. उन्हें दूसरे बड़े मंगल के दिन हनुमान जी को लाल फूल अर्पित कर श्रद्धा से पूजा करनी चाहिए. इसके साथ ही “ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः” मंत्र का 108 बार जाप करना बेहद शुभ माना गया है. यह उपाय मंगल दोष को शांत करता है और विवाह में आ रही बाधाओं को भी दूर करने में सहायक होता है.
ज्योतिष शास्त्र में दूसरे बड़े मंगल के दिन सुंदरकांड का पाठ बेहद शुभ माना गया है. मान्यता है कि श्रद्धा से इसका पाठ करने पर घर की नकारात्मकता दूर होती है और वातावरण सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है. साथ ही बजरंगबली और मंगल देव की कृपा प्राप्त होती है, जिससे सुख-शांति और खुशहाली बनी रहती है।
सूर्य के वृष राशि में आने पर ज्येष्ठ मास का आगमन होता है। ज्येष्ठ का अर्थ है- बड़ा। इस मास में दिन बड़े होते हैं। ज्येष्ठ मास का स्वामी मंगल अग्निकारक है, इसलिए इस मास में भीषण गर्मी पड़ती है। इस माह में जल का विशेष महत्व है। चाहे वह जल-बचाव के रूप में हो या जल-दान के रूप में। इस माह में जल से जुड़े दो विशेष पर्व आते हैं- गंगा दशहरा और निर्जला एकादशी। इन पर्वों पर पानी से भरा घड़ा, पंखा, छाता, जूते-चप्पल आदि का दान करना विशेष पुण्यदायी माना जाता है।


