छत्तीसगढ़

डॉ. रमन सिंह जिला प्रशासन की अव्यवस्था पर भड़के, कहा,15 साल तक में सीएम रहा, लेकिन इस तरह की व्यवस्था नहीं देखी…

छत्तीसगढ़/बेमेतरा : मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत आयोजित सामूहिक विवाह समारोह के दौरान हुई अव्यवस्थाओं को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री एवं विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह खुलकर नाराज नजर आए। तेज आंधी और बारिश के कारण कार्यक्रम बाधित होने के बाद उन्होंने जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कलेक्टर और एसपी को सार्वजनिक रूप से नसीहत दी।

दरअसल, कार्यक्रम के दौरान अचानक मौसम खराब हो गया। तेज आंधी और बारिश के चलते आयोजन स्थल पर अफरा-तफरी मच गई। मुख्य मंच का टेंट क्षतिग्रस्त हो गया और लोगों को बारिश से बचने के लिए कुर्सियां सिर पर रखकर सुरक्षित स्थानों की ओर भागना पड़ा। हालात ऐसे बने कि मुख्यमंत्री के आशीर्वाद समारोह सहित लोकार्पण और भूमिपूजन कार्यक्रम रद्द करना पड़ा।

“सीएम की गरिमा के अनुरूप नहीं थी व्यवस्था”

कार्यक्रम रद्द होने के बाद रेस्ट हाउस में आयोजित संक्षिप्त समारोह में डॉ. रमन सिंह ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल के कई सदस्य बेमेतरा में मौजूद थे, लेकिन जिला प्रशासन उनकी गरिमा के अनुरूप व्यवस्था नहीं कर पाया।

डॉ. रमन सिंह ने कहा, “कलेक्टर और एसपी को मैं साफ शब्दों में कहना चाहता हूं कि यह ठीक तरीका नहीं है। मुख्यमंत्री यहां मौजूद हैं और उनका पीछे से स्वागत किया जा रहा है। यह स्थिति प्रशासनिक गंभीरता पर सवाल खड़े करती है।”

ढाई घंटे में वैकल्पिक जगह तक नहीं ढूंढ पाए… 

पूर्व मुख्यमंत्री ने अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि मौसम खराब होने के बाद भी प्रशासन समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था नहीं कर सका।

उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री, डिप्टी सीएम और मंत्रिमंडल के साथी यहां बैठे रहे, लेकिन प्रशासन ढाई घंटे तक कोई वैकल्पिक स्थान नहीं ढूंढ पाया। इतनी जानकारी भी शायद अधिकारियों को नहीं थी कि प्रदेश का पूरा नेतृत्व यहां मौजूद है।”

पहले कभी ऐसी व्यवस्था नहीं देखी… 

डॉ. रमन सिंह ने अपने लंबे प्रशासनिक अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने 15 वर्षों तक प्रदेश की कमान संभाली, लेकिन इस तरह की अव्यवस्था कभी नहीं देखी।

उन्होंने कहा, “मैं 15 साल तक मुख्यमंत्री रहा, लेकिन इस तरह की व्यवस्था नहीं देखी। चलिए, अब वे सीख जाएंगे। यह नहीं होता तो शायद नहीं सीखते। मुझे जो कहना था, इसलिए मैंने कहा।”

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