21 जून को ब्रह्माकुमारीज़ विश्वभर में मनाएगी अंतरराष्ट्रीय योग दिवस

21 जून को ब्रह्माकुमारीज़ विश्वभर में मनाएगी अंतरराष्ट्रीय योग दिवस
– विश्व के 140 देशों के छह हजार सेवाकेंद्रों पर होंगे आयोजन
– ब्रह्माकुमारीज़ 90 साल से दे रही राजयोग मेडिटेशन का संदेश
– संस्थान की मुख्य शिक्षा है- राजयोग मेडिटेशन
आबू रोड, राजस्थान। ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान द्वारा 21 जून को पूरे विश्वभर में एक साथ व्यापक स्तर पर 12वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाएगा। मुख्य आयोजन मुख्यालय शांतिवन में होगा। देश-विदेश में स्थित ब्रह्माकुमारीज़ सेवाकेंद्रों पर योग दिवस मनाने को लेकर जोर-शोर से तैयारियां की गई हैं।
बता दें कि ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा पिछले 90 वर्ष से राजयोग मेडिटेशन का संदेश जन-जन को दिया जा रहा है। संस्थान की मुख्य शिक्षा का आधार ही राजयोग ध्यान है। नारी शक्ति का विश्व का सबसे बड़ा और विशाल संगठन ब्रह्माकुमारीज़ का अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय सिरोही जिले में है।
5 मई 1950 को संस्थापक ब्रह्मा बाबा 350 भाई-बहनों को लेकर पहली बार माउंट आबू पहुंचे थे। जहां ब्रज कोठी से इस संगठन की शुुरुआत की गई। वर्ष 1937 में स्थापना से लेकर आज तक संस्थान विश्वभर में राजयोग ध्यान का प्रचार-प्रसार कर रही है। वर्तमान में विश्व के 140 देशों में छह हजार से अधिक सेवाकेंद्रों के माध्यम से लोगों को यह शिक्षा दी जा रही है। 50 हजार ब्रह्माकुमारी बहनें समर्पित रूप से सेवाएं दे रही हैं। वहीं 25 लाख से अधिक लोग नियमित रूप से राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास और ईश्वरीय पढ़ाई के विद्यार्थी हैं।
राजयोग ध्यान क्या है?
राजयोग मेडिटेशन अंतर्जगत की वह यात्रा है जिसमें हम अपने विचारों का आत्म निरीक्षण, आत्म विश्लेषण और नियंत्रण करना सीखते हैं। राजयोग का अर्थ है स्वयं की चेतना को श्रेष्ठ बनाकर अपने मन, बुद्धि और संस्कारों पर शासन करना। जब आत्मा अपने वास्तविक स्वरूप को पहचानती है और परमपिता परमात्मा शिव से संबंध जोड़ती है, तब जीवन में शांति, प्रेम, पवित्रता और शक्ति का अनुभव होने लगता है। ब्रह्माकुमारीज़ के अनुसार हम सभी शरीर नहीं, बल्कि एक चैतन्य आत्मा हैं। आत्मा का मूल स्वरूप शांति, प्रेम, आनंद, पवित्रता और शक्ति से भरपूर है। राजयोग के माध्यम से आत्मा अपनी खोई हुई आंतरिक शक्तियों को पुनः जागृत करती है और परमात्मा से दिव्य ऊर्जा प्राप्त करती है।
राजयोग कौन कर सकता है?
राजयोग ध्यान हर मनुष्य के लिए है। इसके लिए किसी विशेष उम्र, जाति, धर्म, स्थान या परिस्थिति की आवश्यकता नहीं है। बच्चा हो या वृद्ध, गृहस्थ हो या व्यवसायी, विद्यार्थी हो या सेवाधारी हर कोई राजयोग का अभ्यास कर सकता है। राजयोग किसी संसार से भागने का मार्ग नहीं, बल्कि संसार में रहते हुए अपने विचारों, भावनाओं और कर्मों को श्रेष्ठ बनाने की कला है। परिवार, कार्यक्षेत्र और समाज में रहते हुए भी व्यक्ति राजयोगी जीवन जी सकता है।
किसी भी सेवाकेंद्र पर सीख सकते हैं राजयोग-
राजयोग सीखने के लिए ब्रह्माकुमारीज़ के स्थानीय सेवाकेंद्रों पर नि:शुल्क सात दिवसीय राजयोग पाठ्यक्रम कराया जाता है। इसमें आत्मा, परमात्मा, कर्म का सिद्धांत, जीवन मूल्यों और सकारात्मक सोच का ज्ञान दिया जाता है। इस ज्ञान के आधार पर व्यक्ति धीरे-धीरे अपने विचारों को शुद्ध, मन को शांत और जीवन को श्रेष्ठ बना सकता है।
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राजयोग ध्यान व्यावहारिक और वैज्ञानिक पद्धति है। आज भारत के साथ विदेशों में भी भाई-बहनें बड़े ही उत्साह के साथ राजयोग सीख रहे हैं। राजयोग वह विधि और पद्धति है जिसके नियमित अभ्यास से हम मन को सशक्त, शक्तिशाली और सकारात्मक बना सकते हैं। राजयोग से ही आत्मा का परमात्मा से मंगल मिलन होता है।
– राजयोगिनी बीके मोहिनी दीदी, मुख्य प्रशासिका, ब्रह्माकुमारीज़
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ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान का उद्देश्य है जन-जन को राजयोग ध्यान का संदेश मिले। लोगों का जीवन सुखी हो। मेरा अनुभव है कि जीवन की सारी समस्याओं का समाधान राजयोग में समाया हुआ है। राजयोग से हमें जीवन जीने की कला आती है। ब्रह्माकुमारीज़ से जुड़े लाखों भाई-बहनें इसका प्रमाण हैं।
– राजयोगिनी बीके मुन्नी दीदी, अतिरिक्त मुख्य प्रशासिका, ब्रह्माकुमारीज़


