कर्मयोग से प्रशासनिक उत्कृष्टता विषय चार दिवसीय रिट्रीट…भारत सहित नेपाल से पहुंचे प्रशासनिक अधिकारी एवं प्रतिभागी

– अधिकार पद से मिलता है, सम्मान आचरण से अर्जित होता है: मंत्री डॉ. मंजू बाघमार
– मानसरोवर में कर्मयोग रिट्रीट का शुभारंभ
– कर्मयोग से प्रशासनिक उत्कृष्टता विषय पर चलेगी चार दिवसीय रिट्रीट
– भारत सहित नेपाल से पहुंचे प्रशासनिक अधिकारी एवं प्रतिभागी
आबूरोड। ब्रह्माकुमारी संस्थान के मानसरोवर परिसर में प्रशासनिक सेवा प्रभाग की ओर से चार दिवसयी ‘कर्मयोग से प्रशासनिक उत्कृष्टता’ विषय पर रिट्रीट एवं प्रशिक्षण का आयोजित किया जा रहा है। इसमें भारत सहित नेपाल से आए प्रतिभागी भाग लिया ले रहे हैं। प्रशिक्षण में प्रशासनिक कार्यों में नैतिकता, कार्यकुशलता, मानवीय मूल्यों और आध्यात्मिक दृष्टिकोण के समन्वय पर मंथन किया जाएगा।

रिट्रीट के शुभारंभ समारोह की मुख्य अतिथि राजस्थान सरकार की पीडब्ल्यूडी एवं महिला एवं बाल विकास विभाग और बाल अधिकारिता विभाग मंत्री डॉ. मंजू बाघमार ने कहा कि एक प्रशासक की वास्तविक उत्कृष्टता उसकी कार्यकुशलता के साथ निष्पक्षता, संवेदनशीलता, नैतिकता और जनकल्याण के प्रति प्रतिबद्धता में निहित है। कर्मयोग हमें सिखाता है कि अधिकार पद से मिलता है, लेकिन सम्मान आचरण से अर्जित होता है। प्रशासन में व्यक्तिगत हित के बजाय सार्वजनिक हित, पारदर्शिता और निष्काम सेवा को प्राथमिकता देना आवश्यक है। उन्होंने अपने 25 वर्षों के अध्यापन अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रशासन की वास्तविक सफलता नियमों और संसाधनों से अधिक उसे संचालित करने वाले लोगों की सोच एवं कार्यसंस्कृति पर निर्भर करती है। किसी समाज की प्रगति का वास्तविक मापदंड उसके वंचित व्यक्ति को मिलने वाले अवसर हैं। इसलिए प्रशासन में सामाजिक न्याय, लैंगिक संवेदनशीलता और समावेशी विकास को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। डिजिटल गवर्नेंस और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस दौर में तकनीक प्रशासन को तेज एवं पारदर्शी बना सकती है, लेकिन मानवीय संवेदनाओं का विकल्प नहीं बन सकती।
प्रशासनिक उत्कृष्टता के लिए पांच संकल्प-
मंत्री डॉ. बाघमार ने कहा कि डॉ. बाघमार ने ब्रह्माकुमारी संस्था की ओर से आत्मचिंतन, सकारात्मक चिंतन और मूल्य आधारित जीवनशैली के माध्यम से व्यक्तित्व विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने प्रशासनिक उत्कृष्टता के लिए पांच संकल्पों पर विशेष जोर दिया। इनमें कर्तव्यनिष्ठा, नैतिक नेतृत्व, संवेदनशील प्रशासन, निरंतर आत्मविकास और राष्ट्र निर्माण के संकल्प शामिल हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक उत्कृष्टता कोई अंतिम उपलब्धि नहीं, बल्कि निरंतर चलने वाली साधना है, जिसमें ज्ञान मार्गदर्शक, नैतिकता आधार, संवेदनशीलता शक्ति और कर्मयोग प्रेरणा है। यहां आकर जिस आध्यात्मिक शांति की अनुभूति हुई है, उसे शब्दों में व्यक्त करना संभव नहीं है। यह सम्मेलन केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने का माध्यम नहीं, बल्कि प्रशासन के उद्देश्य, प्रशासकों के व्यक्तित्व और उनके निर्णयों में निहित मानवीय मूल्यों पर चिंतन करने का महत्वपूर्ण अवसर है। भारतीय संस्कृति में कर्म को केवल दायित्व निर्वहन नहीं, बल्कि समाज कल्याण और लोकमंगल का माध्यम माना गया है।
पारिवारिक मूल्यों का लगातार क्षरण चिंता का विषय-
मध्यप्रदेश, भोपाल से आए मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष अवधेश प्रताप सिंह ने कहा कि समाज में नैतिक एवं पारिवारिक मूल्यों का लगातार क्षरण चिंता का विषय है। इसका प्रभाव प्रशासन पर भी पड़ता है, क्योंकि प्रशासक भी इसी समाज से आते हैं और उन्हें कई बार दबाव, प्रभाव, लोभ एवं तनाव के बीच कार्य करना पड़ता है। पहले परिवार और समाज आपसी विवादों को मिल-बैठकर सुलझा लेते थे, लेकिन आज ऐसे मामले भी आयोग तक पहुंच रहे हैं। यहां तक कि माता-पिता को अपने बच्चों से भरण-पोषण का अधिकार पाने के लिए आयोग में आवेदन करना पड़ रहा है। यह हमारी पारिवारिक और सांस्कृतिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से समाज में नैतिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों को पुनर्स्थापित करने की आवश्यकता है।
जीवन में आध्यात्मिक ज्ञान भी आवश्यक है-
ब्रह्माकुमारीज़ के महासचिव राजयोगी बीके करुणा भाई ने कहा कि संस्था आध्यात्मिक शिक्षा प्रदान कर रही है। संस्थापक पिताश्री ब्रह्मा बाबा ने इसे विद्यालय का स्वरूप देते हुए प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय नाम दिया। सामान्य शिक्षा के साथ आध्यात्मिक ज्ञान भी जीवन में आवश्यक है। अपने जीवन का एक प्रसंग साझा करते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 1960 में पहली बार संस्था में आने पर उनकी मुलाकात दादी हृदयपुष्पा जी से हुई। जब उन्होंने पूछा कि यहां क्या किया जाता है, तो दादी जी ने बताया कि वे परमात्मा को याद करते हैं। इस पर उन्होंने पूछा कि किस परमात्मा को याद करते हैं? तब दादी जी ने उन्हें समझाया कि ईश्वर एक ही है। आध्यात्मिक ज्ञान मनुष्य को ईश्वर की सही पहचान और जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझने का मार्ग दिखाता है।
इन्होंने भी व्यक्त किए अपने विचार-
कार्यक्रम में प्रशासनिक सेवा प्रभाग की उपाध्यक्ष जयपुर राजापार्क सबजोन की निदेशिका राजयोगिनी बीके पूनम दीदी, जम्मू-कश्मीर से आए आईआरएस एवं सीजीएसटी कमिश्नर महेश भारद्वाज, कर्नाटक से प्रभाग की क्षेत्रीय संयोजिका बीके वीणा दीदी, कोलकाता में नेपाल के कौंसल जनरल झाका प्रसाद आचार्य, प्रभाग की अतिरिक्त राष्ट्रीय संयोजिका बीके उर्मिला दीदी, राष्ट्रीय संयोजक बीके हरीश भाई ने भी अपने विचार रखे। गोधरा से आए बीके शैलेष भाई ने आभार व्यक्त किया। संचालन भोपाल की प्रभाग की जोनल संयोजिका बीके रीना दीदी ने किया।


