दिव्य शिवलिंग के दर्शन करने पहुंचे बड़ी संख्या में श्रद्धालु…स्वामी प्रणवानंद जी ने कहा- छत्तीसगढ़ के बाद अन्य राज्यों में ले जाया जाएगा

बलौदा बाजार। दशहरा मैदान में सोमवार को भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। लगभग 1000 वर्षों से सुरक्षित माने जा रहे सोमनाथ मंदिर के ज्योतिर्लिंग के पवित्र अवशेष शिवलिंग श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए शहर लाए गए। इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक अवसर पर सनातनी समाज एवं आर्ट ऑफ लिविंग के संयुक्त तत्वावधान में बलौदा बाजार के दशहरा मैदान में भव्य धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

शिवलिंग का हुआ विशेष पूजन…
कार्यक्रम की शुरुआत में विधि-विधान से पूजा-अर्चना और अभिषेक के साथ हुई। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शिवलिंग का विशेष पूजन किया गया, जिससे पूरा वातावरण शिवमय हो गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु सुबह से ही कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने लगे थे। महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों सहित नगर वासियों ने कतारबद्ध होकर इस दिव्य शिवलिंग के दर्शन किए और आशीर्वाद प्राप्त किया।
कार्यक्रम में उपस्थित आर्ट ऑफ लिविंग के प्रमुख ट्रस्टी स्वामी प्रणवानंद जी महाराज ने कहा कि, श्री श्री रवि शंकर के ट्रस्ट द्वारा सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के पवित्र अंशों को देशभर में ले जाकर श्रद्धालुओं को दर्शन कराने का संकल्प लिया गया है। यह यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और आस्था को जन-जन तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
सोमनाथा के शिवलिंग का अंश…
स्वामी जी ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए बताया कि, चंद्रमा द्वारा सौराष्ट्र के सोमनाथ मंदिर, जो 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम माना जाता है, सदियों से आस्था का केंद्र रहा है। उन्होंने कहा कि इतिहास में मोहम्मद गजनबी ने इस मंदिर पर 17 बार आक्रमण किए और 18वीं बार शिवलिंग को क्षतिग्रस्त किया। वर्तमान में जो अवशेष दर्शन हेतु लाए गए हैं, उन्हें उसी पवित्र शिवलिंग के अंश के रूप में देखा जा रहा है, इस शिवलिंग में एक विशेष मैग्नेटिक ऊर्जा का वास है।
पूरे देश में कराया जाएगा दर्शन…
स्वामी प्रणवानंद जी ने आगे बताया कि, गुरुजनों की मंशा है कि इस दिव्य शिवलिंग के दर्शन पूरे भारतवर्ष के लोगों को कराए जाएं। इसी क्रम में यह पवित्र अवशेष विभिन्न राज्यों में भ्रमण कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ में दर्शन के पश्चात इसे अन्य राज्यों में ले जाया जाएगा और अंततः बेंगलुरु स्थित आर्ट ऑफ लिविंग के मुख्यालय में स्थापित किया जाएगा, जहां यह श्रद्धालुओं के लिए स्थायी रूप से उपलब्ध रहेगा। इसके अन्य अवशेष देश भर में अनेक संतो के पास है जिन्हें एक साथ लाकर सोमनाथ में स्थापित किए जाने की हमारी मंशा है।



